देश के लिए जीते 3 इंटरनेशनल गोल्ड, अब रांची में सब्जी बेचने को मजबूर पैरा एथलीट पुष्पा मिंज
रांची में सब्जी बेचने को मजबूर पैरा एथलीट पुष्पा मिंज
रांची की पैरा एथलीट पुष्पा मिंज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए 3 गोल्ड मेडल जीते हैं. आर्थिक तंगी के कारण आज वह झारखंड की राजधानी में सब्जी बेचने को मजबूर हैं. उनकी कहानी खेल के प्रति जज्बे और संघर्ष को दर्शाती है.
Pushpa Minz International Gold Medalist: जिन खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर देश और राज्य को गर्व होता है, उनमें से कई खिलाड़ी समय के साथ गुमनामी में चले जाते हैं. झारखंड की पैरा एथलीट पुष्पा मिंज भी ऐसी ही खिलाड़ी हैं. पुष्पा ने नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर कई मेडल जीतकर झारखंड और देश का नाम रोशन किया है. इंटरनेशनल स्तर पर वह तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं. एशियन स्तर की प्रतियोगिता में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता है. लेकिन आज यही खिलाड़ी राजधानी रांची में कड़रू ब्रिज के नीचे सब्जी बेचकर अपना जीवन चलाने को मजबूर हैं.
सुबह-शाम सब्जी बेचकर चल रहा गुजारा
पुष्पा मिंज वर्ष 2020 के बाद से कड़रू ब्रिज के नीचे सब्जी बेच रही हैं. कोरोना के बाद उन्होंने यह काम शुरू किया. इससे पहले वह कॉलेज जाती थीं. फिलहाल रांची में किराये के मकान में रहती हैं और महीने में करीब 2 हजार रुपये किराया देती हैं. पुष्पा बताती हैं कि वह सुबह करीब 6:30 बजे से 10 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक सब्जी बेचती हैं. रोजाना 100 से 200 रुपये तक की ही बिक्री हो पाती है. कई बार सब्जी नहीं बिकती तो वह खराब हो जाती है और उसे फेंकना पड़ता है. ऐसे में सब्जी खरीदने में लगाया पैसा भी डूब जाता है.

मजबूरी के बीच खेल का जज्बा बरकरार
आर्थिक परेशानियों के बावजूद पुष्पा ने खेलना नहीं छोड़ा है. वह अभी भी थ्रोबॉल की प्रैक्टिस करती हैं. प्रैक्टिस के लिए आने-जाने का खर्च भी उनके लिए बड़ी चुनौती है. पुष्पा का कहना है कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए रहने और अभ्यास की बेहतर सुविधाएं हैं, लेकिन उनके पास अपना ग्राउंड या हॉस्टल जैसी सुविधा नहीं है. वह चाहती हैं कि खिलाड़ियों के लिए रहने की सुविधा और थ्रोबॉल की प्रैक्टिस के लिए अलग मैदान उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह अपने खेल को आगे जारी रख सकें.
नेपाल, थाईलैंड और कंबोडिया में किया देश का प्रतिनिधित्व
पुष्पा मिंज ने नेपाल, थाईलैंड और कंबोडिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. वह इंटरनेशनल स्तर पर तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं. नेशनल स्तर पर भी उनके नाम कई गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल हैं. उनका कहना है कि उनके खेल के सफर में उनके कोच मुकेश सर का बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने हर संभव सहयोग देकर उन्हें यहां तक पहुंचाया.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी कर चुकी हैं मुलाकात
पुष्पा के अनुसार, इंटरनेशनल प्रतियोगिता से लौटने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की थी. उस दौरान खिलाड़ियों का सम्मान किया गया था. पुष्पा का कहना है कि उस समय उन्हें प्रतियोगिता में हुए खर्च की राशि वापस किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक उन्हें वह राशि नहीं मिली है.
सरकार से सिर्फ नौकरी की मांग
पुष्पा की सबसे बड़ी मांग नौकरी है. उनका कहना है कि अगर उन्हें नौकरी मिल जाए तो उन्हें सब्जी बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी और वह अपने खेल पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकेंगी. पुष्पा कहती हैं कि उन्होंने देश और झारखंड का नाम रोशन किया है और आज भी आगे खेलने का जज्बा उनके अंदर है. वह चाहती हैं कि सरकार उन्हें ऐसी नौकरी दे, जिससे उनका जीवन स्थिर हो सके और वह नियमित रूप से अभ्यास कर भविष्य में देश और झारखंड के लिए और मेडल जीत सकें.
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