चाय खेती के लिए ड्रेन के खिलाफ किसान हुए एकजुट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jan 2017 7:56 AM

विज्ञापन

जलपाईगुड़ी. जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के दक्षिण बेरूबाड़ी में बांग्लादेश सीमा से लगे दैखाता इलाके में कृषि जमीन के बगल में चाय की खेती के लिए ड्रेन तैयार करने को लेकर हंमामा मचा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि हाइ ड्रेन बनाये जाने से खेती को काफी नुकसान होगा. ग्रामीणों ने ड्रेन बनाये जाने के […]

विज्ञापन
जलपाईगुड़ी. जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के दक्षिण बेरूबाड़ी में बांग्लादेश सीमा से लगे दैखाता इलाके में कृषि जमीन के बगल में चाय की खेती के लिए ड्रेन तैयार करने को लेकर हंमामा मचा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि हाइ ड्रेन बनाये जाने से खेती को काफी नुकसान होगा. ग्रामीणों ने ड्रेन बनाये जाने के काम को फिलहाल रोक दिया है. केवल 20 बीघा जमीन पर चाय की खेती के लिए तैयार किये जा रहे हाइ ड्रेन से दैखाता के करीब 21 किसानों की 150 बीघा जमीन पर खेती-बारी बंद होने का संकट मंडरा रहा है. मंगलवार को जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के भूमि एवं भूमि राजस्व अधिकारी ने इस मामले की जांच का आदेश दिया.
बीते साल उत्तर प्रदेश से आये कन्हाईलाल यादव नामक एक व्यक्ति ने दैखाता गांव में 20 बीघा जमीन पर चाय की खेती के लिए जमीन को तैयार करना शुरू किया. इसे लेकर करीब 21 स्थानीय किसानों ने बीते साल 25 जनवरी को जिला प्रशासन और ब्लॉक भूमि राजस्व कार्यालय में लिखित शिकायत की. इसी जमीन में कन्हाईलाल यादव ने हाइ ड्रेन (बड़ा नाला) तैयार करने का काम शुरू किया. बाद में दो पक्षों के बीच झमेला होने पर मामला पुलिस, एसडीओ कोर्ट, भूमि राजस्व विभाग पहुंचा. कुछ किसान गिरफ्तार भी हुए. इसके बाद जमीन मालिक ने ड्रेन तैयार करने का काम बंद कर दिया. दैखाता के दो किसानों मदन साहा और अकतारुल रहमान का आरोप है कि कन्हाईलाल यादव ने जमीन पर हाइ ड्रेन बनाने का काम फिर से शुरू कर दिया है. किसानों की जमीन में धान, पाट, तिल की फसल होती है. ड्रेन बनने से पूरा पानी ड्रेन खींच लेगा और उनके खेत पानी के अभाव में सूख जायेंगे. मजबूरन उन्हें खेती-बारी छोड़नी पड़ेगी. इसलिए हम लोग किसी सूरत में हाइ ड्रेन नहीं बनने देंगे. कृषि जमीन के मालिक आदिवासी राजेन, मानिकराम और टुटी भगत ने बताया कि वे लोग किसी तरह अपनी जमीन जोत-बोकर घर-परिवार चलाते हैं. चाय की खेती के लिए ड्रेन बनाने से उनके खेतों में जल संकट पैदा हो जायेगा. एक अन्य किसानों अकबर अली और प्रेमानंद राय ने कहा कि वे लोग अपने खेत बचाने के लिए अपनी जिंदगी भी कुर्बान कर देंगे. मंगलवार को सभी किसान जलपाईगुड़ी ब्लॉक भूमि राजस्व अधिकारी के पास पहुंचे और चाय की खेती व हाइ ड्रेन का काम अविलंब रुकवाने की मांग की. मदन साहा ने कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मांग पर अमल नहीं करता तब तक वे लोग प्रतिरोध करके हाइ ड्रेन काम रोके रखेंगे.
इस बारे में विशेषज्ञ की दृष्टि से जलपाईगुड़ी जिले के कृषि उप-निदेशक ने बताया कि चाय की खेती के लिए जमीन को थोड़ा ढालू करना होता है, ताकि उसमें पानी नहीं रुके. इसके लिए ड्रेन बनाये जाते हैं. अगर चाय खेती की जमीन से लगी अन्य खेतिहर जमीन है, तो ड्रेन उन खेतों का पानी भी खींच लेंगे. यह एक तरह से नियम है.
इधर चाय की खेती के लिए जमीन तैयार कर रहे कन्हाईलाल यादव से फोन पर संपर्क नहीं हो सका. जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के भूमि राजस्व अधिकारी विप्लव हलदार ने बताया कि कन्हाईलाल यादव ने उनके पास लिखित आवेदन दिया है कि वे अपनी जमीन पर चाय की खेती के लिए जल निकासी बनाना चाहते हैं. अब उन्हें दैखाता गांव के स्थानीय किसानों की भी शिकायत मिली है. उन्होंने इस घटना की जांच रेवेन्यू इंस्पेक्टर को करने को कहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola