बंगाल के स्कूलों में सुबह-सुबह वंदे मातरम गाना अनिवार्य, शुभेंदु अधिकारी सरकार ने वीडियो रिकॉर्डिंग भी करने को कहा

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 14 May 2026 1:59 PM

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Vande Mataram Mandatory in West Bengal Schools: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य कर दिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार से इसे लागू करने का आदेश दिया है. जानें क्या है इस आदेश में.

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Vande Mataram Mandatory in West Bengal Schools: पश्चिम बंगाल की नयी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा ‘राष्ट्रवादी’ बदलाव किया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा (Assembly) के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया है. स्कूल शिक्षा विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. इसे सोमवार से सख्ती से लागू किया जायेगा. मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि राष्ट्र के प्रति सम्मान जगाने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था.

सोमवार से बदल जायेगी स्कूलों की प्रार्थना

शिक्षा विभाग द्वारा 13 मई को जारी निर्देश के अनुसार, अब राज्य के हर स्कूल में कक्षाओं की शुरुआत से पहले होने वाली सभा में ‘वंदे मातरम’ गाया जायेगा. आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभा में मौजूद प्रत्येक छात्र को राष्ट्रगीत के गायन में भाग लेना होगा. आदेश को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जायेगा. स्कूलों को प्रमाण के तौर पर असेंबली का दस्तावेजीकरण करना होगा. वीडियो रिकॉर्डिंग भी करने को कहा गया है.

बंगाल के सचिवालय ‘नबान्न’ से होगी सीधी निगरानी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अगले सोमवार से इसकी शुरुआत होगी. मैं खुद नबान्न (सचिवालय) जाकर इस आदेश के कार्यान्वयन की समीक्षा करूंगा.

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केंद्र के सख्त कानून और बंगाल का नया मिजाज

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में संशोधन की तैयारी कर रही है. नये नियमों के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन में जान-बूझकर बाधा डालना अब एक दंडनीय अपराध बन सकता है. बंगाल सरकार के इस फैसले को केंद्र की उसी राष्ट्रवादी मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है.

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समय और गीतों के क्रम पर उलझे शिक्षक

अब तक बंगाल के स्कूलों में मुख्य रूप से रवींद्रनाथ टैगोर रचित राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया जाता था. पिछली ममता बनर्जी सरकार ने ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ को राज्य गीत के रूप में पेश किया था. अब बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय रचित ‘वंदे मातरम’ के जुड़ जाने से शिक्षकों के बीच कुछ व्यावहारिक सवाल उठ रहे हैं.

  • शिक्षकों के एक वर्ग का कहना है कि सुबह की सभा का समय सीमित होता है. इतने सारे गीतों को एक साथ गाने से कक्षाओं के समय पर असर पड़ सकता है.
  • वामपंथी शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि सरकार गीतों के क्रम और समय-सारणी (Time-Table) को लेकर और अधिक स्पष्ट निर्देश जारी करे.

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दशकों बाद स्कूलों में गूंजेगा वंदे मातरम

बंगाल की मिट्टी से उपजे वंदे मातरम की घर वापसी को भाजपा सरकार अपनी एक बड़ी सांस्कृतिक जीत मान रही है. दशकों बाद बंगाल के स्कूलों में वंदे मातरम की गूंज सुनाई देगी, जो राज्य की बदलती राजनीतिक और सामाजिक दिशा का स्पष्ट संकेत है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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