दुर्गा पूजा के दौरान बंद का समर्थन नहीं : अहलुवालिया

Published at :28 Sep 2016 8:07 AM (IST)
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दुर्गा पूजा के दौरान बंद का समर्थन नहीं : अहलुवालिया

ममता सरकार पर भी साधा निशाना, स्थिति बिगड़ने के लिए ठहराया जिम्मेदार सिलीगुड़ी : र्गा पूजा से पहले पहाड़ पर किसी भी प्रकार के बंद का भाजपा समर्थन नहीं करती है. बंद से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इससे स्थिति और बिगड़ेगी. यह बातें केन्द्रीय मंत्री तथा दार्जिलिंग के भाजपा सांसद एसएस अहलुवालिया ने […]

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ममता सरकार पर भी साधा निशाना, स्थिति बिगड़ने के लिए ठहराया जिम्मेदार
सिलीगुड़ी : र्गा पूजा से पहले पहाड़ पर किसी भी प्रकार के बंद का भाजपा समर्थन नहीं करती है. बंद से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इससे स्थिति और बिगड़ेगी. यह बातें केन्द्रीय मंत्री तथा दार्जिलिंग के भाजपा सांसद एसएस अहलुवालिया ने कही. वह सिलीगुड़ी नगर निगम में वार्ड नंबर 15 के निर्दलीय काउंसिलर रहे स्वर्गीय अरविंद घोष उर्फ आमू दा के श्राद्ध में शामिल होने के लिए आये हुए थे.
इस दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि बुधवार को गोजमुमो द्वारा आहूत पहाड़ बंद का वह समर्थन नहीं करते हैं. लेकिन आखिर इस तरह की नौबत क्यों आयी. उन्होंने राज्य सरकार तथा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पहाड़ की स्थिति को खराब करने का आरोप लगाया. श्री अहलुवालिया ने कहा कि ममता बनर्जी ने जीटीए को विकास के लिए चार हजार करोड़ रुपये देने की बात कह कर गोजमुमो नेता बिमल गुरूंग की छवि खराब करने की कोशिश की है. पहाड़ के लोगों को ऐसा लग रहा है कि राज्य सरकार ने विकास के लिए पैसा तो दिया, लेकिन बिमल गुरूंग तथा अन्य गोजमुमो नेता पैसे को खा गये. ममता बनर्जी जिस चार हजार करोड़ रुपये देने की बात कर रही हैं, उसका उन्हें खुलासा करना चाहिए.
जीटीए एक स्वायत्त निकाय है. राज्य सरकार कोई भी पैसा सीधे जीटीए चीफ को नहीं देती. विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा जिला अधिकारी कार्यालय के माध्यम से जीटीए के विभिन्न विभागों को पैसा दिया जाता है. सबकुछ साफ है. राज्य सरकार के सरकारी विभागों से ही पता चल जायेगा कि आखिरकार जीटीए को कितनी रकम दी गई है. ममता बनर्जी को यह नहीं भूलना चाहिए कि यदि उन्होंने चार हजार रुपये की रकम दी है तो ये पैसे चार साल में दिये गये हैं. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में जीटीए के अधीन तीन महकमा है. पैसे खर्च कहां हुए इसका पूरा हिसाब-किताब राज्य सरकार के विभागों के पास ही होगा. यदि बिमल गुरूंग पैसे दिये जाने के संबंध में ममता बनर्जी से सबूत मांग रहे हैं तो इसमें क्या परेशानी है. यदि ममता बनर्जी ने सच में इतने रकम दिये हैं तो उन्हें इसका सबूत पेश करना चाहिए. राज्य की मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने आगे कहा कि आखिर स्थिति इतनी क्यों बिगड़ गई है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है.
ममता बनर्जी को इस पर विचार करना चाहिए. जीटीए का निर्माण उन्होंने ही किया है. राज्य सरकार, केन्द्र सरकार तथा गोजमुमो के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद जीटीए का गठन हुआ है. मुख्यमंत्री जीटीए के काम-काज में हस्तक्षेप कर रही हैं. इसी वजह से पहाड़ की स्थिति बिगड़ी है. गोरखा जाति के लोग ममता बनर्जी को काफी प्यार करते थे. अब उनमें अविश्वास का माहौल पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में कोई बुराई नहीं है. जब जीटीए समझौता हो रहा था, तभी यह तय हो गया था कि गोजमुमो अलग राज्य की मांग से पीछे नहीं हटा है. ममता बनर्जी भी इस बात को जानती हैं. यदि उन्हें गोरखालैंड नाम से इतनी ही चिढ़ है तो उन्हें जीटीए समझौता ही नहीं करना चाहिए था.
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