चिंता: खाली पदों को भर पाना हुआ मुश्किल, राज्य में है चिकित्सों की कमी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jun 2016 1:24 AM
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सिलीगुड़ी: राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की संख्या काफी कम है. सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति के लिए चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं. यह बातें राज्य स्वास्थय विभाग के निदेशक डा. विश्वरंजन शतपति ने कही. गुरूवार को उन्होंने सिलीगुड़ी के हाशमी चौक स्थित लोक निर्माण भवन में जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के […]
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सिलीगुड़ी: राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की संख्या काफी कम है. सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति के लिए चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं. यह बातें राज्य स्वास्थय विभाग के निदेशक डा. विश्वरंजन शतपति ने कही. गुरूवार को उन्होंने सिलीगुड़ी के हाशमी चौक स्थित लोक निर्माण भवन में जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक बैठक की. बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए डा. शतपति ने कहा कि पूरे राज्य के अस्पतालों में नियुक्ति प्रक्रिया जारी है.
पूरे राज्य में विभिन्न विभागों में करीब दो हजार चिकित्सकों की आवश्यकता है. इसके अतिरिक्त अस्पतालों के अन्य पदों के लिए भी नियुक्ति प्रक्रिया जारी है. आलम यह है कि चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं. नियुक्ति मिलने के बाद भी चालीस प्रतिशत चिकित्सक पद को स्वीकार नहीं करते हैं. जाहिर है ये चालीस प्रतिशत पद फिर से रिक्त रह जाते हैं. यह एक बड़ी समस्या है. उन्होंने कहा कि ऐसे मेडिकल कॉलेज जो हाल में ही खुल हैं अथवा खुलने वाले हैं, उन पर ही निगाह रखनी पड़ेगी. इन कॉलेजों से जब नये चिकित्सक निगलेंगे तब राज्य में चिकित्सकों की कमी दूर हो सकती है.
पोलियो जीवाणु को लेकर सनसनी : भारत पोलियो मुक्त देश है. वर्ष 1994 में अमेरिका को पोलियो मुक्त देश होने का प्रमाण पत्र मिल चुका है. उसके बाद भारत में इस अभियान की शुरूआत की गयी. वर्ष 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भारत को पोलियो मुक्त देश का दर्जा दे दिया. हाल ही में दक्षिण भारत में पोलियो के कुछ जीवाणु पाये गये है. भारत में फिर से पोलियो के जीवाणु पाये जाने से हलचल है. इस संबध में राज्य स्वास्थ्य विभाग के निदेशक विश्वरंजन शतपति ने कहा कि पोलियो के जीवाणु को लेकर अधिक परेशान होने की आवश्कता नहीं है. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि भारत एक पोलियो मुक्त देश है. केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय की ओर से इस संबध में कोई निर्देश जारी होने पर आवश्यक कदम उठाया जायेगा.
मानसिक रोगियों के लिए खास उपाय
इसके अतिरिक्त केंद्र की एक परियोजना के अंतर्गत जलपाईगुड़ी व कूचबिहार के मानसिक रोगियों को चिन्हित कर उनकी चिकित्सका, काउंसिलिंग आदि के लिये स्वास्थ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किये जाने की व्यवस्था की जा रही है. डा. शतपति ने कहा कि टीकाकरण पर जोर देने की वजह से पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार जापानी एन्सेफ्लाइटिस के महामारी की संभावना काफी कम है. फिर भी इसके लिये अस्पतालों में विशेष व्यवस्था की गयी है.
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