नयी सरकार पर टिकी चाय श्रमिकों की उम्मीद
सिलीगुड़ी. विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में बनने वाली नयी सरकार से चाय श्रमिकों को काफी उम्मीदें हैं. यही वजह है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी चाय श्रमिकों ने 17 तारीख को हुए मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अधिकांश चाय बागान इलाकों में भारी मतदान हुआ है. यहां तक कि बदहाल रेडबैंक, सुरेन्द्र […]
सिलीगुड़ी. विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में बनने वाली नयी सरकार से चाय श्रमिकों को काफी उम्मीदें हैं. यही वजह है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी चाय श्रमिकों ने 17 तारीख को हुए मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अधिकांश चाय बागान इलाकों में भारी मतदान हुआ है. यहां तक कि बदहाल रेडबैंक, सुरेन्द्र नगर तथा धरनीपुर चाय बागान के श्रमिकों ने भी जमकर मतदान किया. यह तीनों ही चाय बागान 2013 से बंद है. हालांकि राज्य सरकार ने इन तीनों चाय बागानों का अधिग्रहण किया है, लेकिन यहां के चाय श्रमिकों की स्थिति नहीं बदली है. चाय बागान के स्थायी कर्मचारियों को ही राज्य सरकार से फौलाई योजना के रुपये और राशन मिल रहे हैं. अस्थायी श्रमिक अभी भी बदहाल हैं. काम की तलाश में काफी श्रमिकों का यहां से पलायन हो चुका है.
चाय बागान की स्थिति भी अच्छी नहीं है. चाय के पौधे मर रहे हैं और फैक्ट्रियों से संयंत्रों की चोरी हो रही है. मतदान से पहले इन बागानों में चुनाव को लेकर श्रमिकों में कोई उत्साह देखने को नहीं मिला था. इसी वजह से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार भी यहां चुनाव प्रचार करने नहीं जा रहे थे. कांग्रेस के जोसेफ मुंडा को छोड़कर किसी ने भी यहां चुनाव प्रचार नहीं किया. मतदान के दिन इन चाय बागानों के अधिकांश श्रमिकों ने मतदान किया है. सुरेन्द्रनगर चाय बागान के जयामिंज, रेडबैंक के लिविल मिंज, शेखर प्रधान तथा धरनीपुर चाय बागान के शानू खैरवार आदि श्रमिकों का कहना है कि वह लोग काफी कष्ट में हैं. दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाना संभव नहीं है. अधिग्रहण के बाद भी सरकार ने बागान को चलाने की कोशिश नहीं की. मतदान के समय में इन लोगों ने कहा कि वह लोग नयी सरकार से काफी उम्मीद लगाये बैठे हैं.
चुनाव के बाद जो भी सरकार बनेगी, उम्मीद है कि वह चाय श्रमिकों के हित में कुछ काम करेगी. इसी उम्मीद को लेकर ही श्रमिकों ने मतदान किया है. इन चाय श्रमिकों ने आगे कहा कि अभी डायना नदी में गिट्टी पत्थर तोड़कर किसी तरह से अपनी आजीविका चला रहे हैं.
नयी सरकार यदि बागान खोल दे तो श्रमिकों को काफी लाभ होगा. यहां उल्लेखनीय है कि इन चाय बागानों में इस बार 80 प्रतिशत से भी अधिक मतदान हुआ है. सुरेन्द्रनगर चाय बागान में मतदाताओं की संख्या 14 सौ है. यहां 82 प्रतिशत मतदान हुआ है. रेडबैंक में 21 सौ मतदाता हैं और यहां 80 प्रतिशत मतदान हुआ है. सबसे अधिक मतदान 85 प्रतिशत धरनीपुर चाय बागान में हुआ है. 1229 मतदाता हैं.
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