पांच साल में अशोक भट्टाचार्य पर दर्ज हुए पांच मुकदमे

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सिलीगुड़ी: वाम मोरचा सरकार में 20 साल तक मंत्री रहने के बाद वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से माकपा नेता तथा वाम मोरचा उम्मीदवार अशोक भट्टाचार्य की हार हुई थी. तब से लेकर अब तक अशोक भट्टाचार्य के खिलाफ कुल पांच मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. इस बात का खुलासा चुनाव […]

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सिलीगुड़ी: वाम मोरचा सरकार में 20 साल तक मंत्री रहने के बाद वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से माकपा नेता तथा वाम मोरचा उम्मीदवार अशोक भट्टाचार्य की हार हुई थी. तब से लेकर अब तक अशोक भट्टाचार्य के खिलाफ कुल पांच मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. इस बात का खुलासा चुनाव आयोग के समक्ष अशोक भट्टाचार्य के द्वारा जमा कराये गये एफीडेविट से हुआ है. राज्य में तृणमूल सरकार बनने के बाद अशोक भट्टाचार्य के खिलाफ पिछले पांच वर्षों में पांच मुकदमे दर्ज हो गये. उनके ऊपर कई गंभीर धाराएं भी लगायी गयी है. चुनाव आयोग में उन्होंने जो एफीडेविट जमा कराया है, उसके अनुसार उनके खिलाफ सभी मुकदमे सिलीगुड़ी थाने में दर्ज हुए हैं और सिलीगुड़ी अदालत में ही इन मुकदमों की सुनवाई भी चल रही है.

उनके खिलाफ पहला केस वर्ष 2013 में दर्ज हुआ. सिलीगुड़ी थाना में दर्ज केस नंबर 381/13 के तहत उन पर धारा 341, 334, 336, 337, 325/3/4 लगायी गई है. इसके अलावे वर्ष 2013 में ही उनके खिलाफ सिलीगुड़ी थाने में अन्य चार मामले दर्ज हुए हैं. हाल ही में एक मामले में वह सिलीगुड़ी अदालत में पेश हुए थे, जहां से उन्हें जमानत दे दी गई थी. सिलीगुड़ी थाने में केस नंबर 383/13 के तहत उन पर आइपीसी की धाराएं 145, 341, 283 तथा 32 लगायी गई हैं. उन्होंने जो एफीडेविट जमा करायी है, उसके अनुसार उनके ऊपर पांचों केस लगातार दर्ज हुए हैं. यही वजह है कि केस नंबर 381/13 के बाद उनके खिलाफ दर्ज मामलों का केस नंबर 383/13, 384/13, 385/13 तथा 386/13 है. अपनी एफीडेविट में श्री भट्टाचार्य ने अपनी संपत्ति का भी खुलासा किया है.

दूसरी तरफ उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार बाइचुंग भुटिया ने अपनी संपत्ति के खुलासे से संबंधित एफीडेविट जमा नहीं कराये हैं. बहरहाल, अशोक भट्टाचार्य ने जो संपत्ति का खुलासा किया है उसके अनुसार वर्ष 2011 के मुकाबले उनकी संपत्ति में मामूली वृद्धि हुई है. 2011 के चुनाव के समय उन्होंने वर्ष 2009-10 में आयकर रिटर्न का हवाला दिया था. तब उन्होंने कैश इन हैंड 2000 रुपया दिखाया था, जबकि इस बार इस मद में उन्होंने कैश इन हैंड 2500 रुपये दिखाया है. इसके साथ ही उन्होंने इस वर्ष अपने दो बैंक खातों की जानकारी दी है, जिसमें से एक खाते में एक लाख 17 हजार तथा दूसरे खाते में एक लाख 73 हजार 320 रुपये जमा हैं. वर्ष 2011 में उन्होंने जिन दो बैंक खातों का विवरण दिया था, उनमें से एक खाते में एक लाख 59 हजार तथा दूसरे में 51 हजार 358 रुपये जमा थे. अशोक भट्टाचार्य के पास तब भी कोई कार नहीं थी और इस बार भी कोई कार नहीं है. एफीडेविट के अनुसार अशोक भट्टाचार्य के मुकाबले उनकी पत्नी ज्यादा अमीर हैं. वर्ष 2011 के मुकाबले इस बार उनकी संपत्ति में बढ़ोत्तरी हुई है और उनके पास एक मारूति रिट्ज कार भी है. यह कार उन्होंने कुछ वर्षों पहले ही खरीदी होगी.

डब्ल्यूबी-74एए-6008 नंबर की कार की कीमत चार लाख 86 हजार 717 रुपये दिखाया गया है. इसके अलावा अशोक भट्टाचार्य की पत्नी के बैंक खातों में भी बढ़ोत्तरी हुई है. 2011 में जो विवरण उन्होंने जमा दिया था, उसके अनुसार उनकी पत्नी के एक बैंक खाते में एक लाख 97 हजार 616 तथा दूसरे खाते में एक लाख 57 हजार 448 रुपये जमा थे. इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर क्रमश: तीन लाख 93 हजार 480 तथा दो लाख 97 हजार 502 रुपये हो गया है. उनकी पत्नी के गहने आदि में कोई वृद्धि नहीं हुई है. इसी तरह से अचल संपत्ति में भी किसी प्रकार की कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है. 2011 के एफीडेविट में उन्होंने सिलीगुड़ी में अपने पैतृक घर तथा कोलकाता में एक फ्लैट होने की जानकारी दी थी. वर्तमान में भी यही संपत्ति उनके पास है. हालांकि इसकी वर्तमान बाजार कीमत काफी बढ़ गई है.

संपत्ति संबंधित एफिडेविट नहीं जमा कराने पर होगा नामांकन रद्द : दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार बाइचुंग भुटिया ने मुकदमा आदि से संबंधित एफिडेविट तो जमा करा दिये हैं, लेकिन संपत्ति के खुलासे से संबंधित एफिडेविट को जमा नहीं कराया गया है. इस एफिडेविट को बाद में जमा करायेंगे. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, यदि निर्धारित अवधी तक कोई उम्मीदवार अपनी संपत्ति से संबंधित एफिडेविट जमा नहीं कराता है, तो उनका नामांकन रद्द हो जायेगा. महकमा चुनाव अधिकारी तथा सिलीगुड़ी के एसडीओ राजनवीर सिंह कपूर का कहना है कि नामांकन पत्रों की जांच की तिथि तक एफिडेविट जमा कराना अनिवार्य है. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, यह जरूरी नहीं है कि चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार नामांकन की तिथि को ही एफिडेविट जमा करा दे.
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