चिंता. चाय बागान मालिक नहीं देना चाहते हैं जमीन, हासीमारा-जयगांव एशियन हाइवे को लेकर अनिश्चितता
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अलीपुरद्वार: अधिकांश चाय बागान मालिक जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं. इसकी वजह से हासीमारा से जयगांव तक बनने वाले एशियन हाइवे के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है. सरकार चाय बागान मालिकों को जमीन के बदले में मुआवजा देने की बात कह रही है, फिर भी बागान मालिक इस सड़क के निर्माण के लिए […]
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अलीपुरद्वार: अधिकांश चाय बागान मालिक जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं. इसकी वजह से हासीमारा से जयगांव तक बनने वाले एशियन हाइवे के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है. सरकार चाय बागान मालिकों को जमीन के बदले में मुआवजा देने की बात कह रही है, फिर भी बागान मालिक इस सड़क के निर्माण के लिए जमीन छोड़ने को राजी नहीं हैं. बागान मालिकों का कहना है कि इससे श्रमिकों को लेकर संकट खड़ा हो सकता है. इस सड़क को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित कूचबिहार के चेंगराबांधा से मयनागुड़ी, धूपगुड़ी, गयेरकाटा, वीरपाड़ा, मदारीहाट, हासीमारा और जयगांव होते हुए भूटान तक जाना है. चेंगराबांधा से हासीमारा तक आठ-नौ किलोमीटर सड़क के लिए जमीन को लेकर कोई जटिलता नहीं है. लेकिन हासीमारा से जयगांव तक 19 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए जमीन लेने में परेशानी पेश आ रही है.
हासीमारा से जयगांव के बीच एशियन हाइवे को सुभाषिनी, बिच, भरनाबाड़ी, सांताली और तोरसा नामक पांच चाय बागानों से गुजरना है. इसके लिए सरकार की ओर से नोटिफिकेशन भी जारी हो गया है. लेकिन बागान मालिक समस्या का हवाला देते हुए जमीन नहीं छोड़ना चाह रहे हैं. इस जटिलता का हल निकालने के लिए शनिवार को अलीपुरद्वार के जिला शासक देवीप्रसाद कर्णम ने बागानों के मैनेजरों, भूराजस्व विभाग और एशियन हाईवे के प्रबंधन के साथ एक बैठक की. बैठक में सांताली को छोड़कर चार बागानों के मैनेजर उपस्थित हुए. बैठक में एशियन हाइवे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर दीपक सिंह, अतिरिक्त जिला शासक भूमि, एथेना मजूमदार और चाय मालिकों के संगठन डुवार्स ब्रांच ऑफ इंडियन टी एसोसिएशन (डीबीआईटीए) के सचिव सुमंत गुहा ठाकुरता भी उपस्थित थे. दो घंटे तक चली इस बैठक में कोई रास्ता नहीं निकल पाया. बागान मैनेजरों ने बताया कि हासीमारा से जयगांव तक अभी 19 किलोमीटर की सार्क सड़क मौजूद है. उन्होंने सुझाव दिया कि इसी सार्क सड़क को एशियन हाइवे से जोड़ दिया जाये. लेकिन प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं है.
सुभाषिनी चाय बागान के मैनेजर अबिंदु राय ने कहा कि इस सड़क के लिए सुभाषिनी चाय बागान की 1.5 हेक्टेयर बिच बागान की 2.75 हेक्टेयर सांताली बागान की 12 हेक्टेयर, भरनाबाड़ी की 3 हेक्टेयर और तोर्सा बागान की 25 हेक्टेयर जमीन चली जायेगी. मुआवजा पैकेज लेने के लिए हमलोगों पर दबाव बनाया जा रहा है. डीबीआईटीए के सचिव सुमंत गुहा ठाकुरता ने कहा कि रास्ते के लिए जमीन दे देने से बहुत से श्रमिकों का काम छिन जायेगा. इसके चलते बागान मालिकों को विभिन्न तरह की कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ेगा. जमीन का क्षेत्रफल घटने से बागानों में उत्पादन भी कम हो जायेगा. इस स्थिति से कैसे निपटा जायेगा, इस पर हमलोगों को अभी और चर्चा करनी होगी.
इस संबंध में जिला शासक ने कहा कि मसले का हल निकालने के लिए मैंने सभी पक्षों के साथ बैठक की है. आशा है कि समाधान निकल आयेगा. एशियन हाईवे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर दीपक सिंह ने कहा कि बागान मालिकों को सरकारी दर से उपयुक्त मुआवजे का भुगतान किया जायेगा. हासीमारा से जयगांव तक वर्तमान सार्क रोड को एशियन हाइवे के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना संभव नहीं होगा. इसके अलावा ऐसा करने पर उस रास्ते के दोनों तरफ के पांच हजार स्थानीय लोग प्रभावित होंगे.
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