दस संतानों की मां अस्पताल में लावारिस, भरती कराने के बाद 32 दिन से कोई नहीं आया पूछने
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सिलीगुड़ी. एक बांग्ला कहावत है- ‘भागेर मां गंगार सुख पाय ना’. इसे 95 वर्षीया शांतिबाला साहा के मामले में चरितार्थ होते देखा जा सकता है. दस संतानों की यह वृद्ध मां पिछले 32 दिनों से सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में लावारिस हाल है. उनकी नौ संतानें अभी जीवित हैं. लेकिन कोई उन्हें देखने तक नहीं आ […]
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सिलीगुड़ी. एक बांग्ला कहावत है- ‘भागेर मां गंगार सुख पाय ना’. इसे 95 वर्षीया शांतिबाला साहा के मामले में चरितार्थ होते देखा जा सकता है. दस संतानों की यह वृद्ध मां पिछले 32 दिनों से सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में लावारिस हाल है. उनकी नौ संतानें अभी जीवित हैं. लेकिन कोई उन्हें देखने तक नहीं आ रहा है. जिस मां ने हर तकलीफ सह अपने बच्चों को पाला, अब वही बच्चे मां के इलाज के खर्च के भुगतान को लेकर आपस में लड़ रहे हैं. आखिरकार लीगल एड फोरम ने तीन संतानों के विरुद्ध मामला दायर किया है.
बुधवार को यहां एक पत्रकार सम्मेलन में उपस्थित लीगल एड फोरम, दार्जिलिंग के जिला महासचिव अमित सरकार ने इस मामले को उजागर किया. श्री सरकार से मिली जानकारी के अनुसार, शांतिबाला साहा अपने भरे-पूरे परिवार के साथ चयनपाड़ा के दासपाड़ा इलाके में रहती थीं. उनके एक पुत्र की मौत हो चुकी है. अभी उनके पांच पुत्र एवं चार पुत्रियां हैं. नाती-पोतों से भरे इस परिवार में बस एक वृद्धा शांतिबाला को ही कष्ट है. शांति के पुत्र हैं गोविंद साहा, स्वर्गीय महादेव साहा, मनोरंजन साहा, निरंजन साहा, वीरेन साहा एवं विमल साहा. चार पुत्रियां हैं गौरी राय, अंजली चक्रवर्ती, उर्मिला साहा, प्रतिमा साहा.
सभी संतानों की शादी के बाद शांतिबाला अपने पति एवं छोटे बेटे विमल के साथ दासपाड़ा की जमीन बेचकर तेलीपाड़ा में जमीन खरीदकर रहने लगीं. कुछ दिनों के बाद पति के स्वर्ग सिधार जाने के बाद उन्होंने अपनी जमीन चार लाख रुपये में बेच दी. इन चार लाख रुपयों में से शांति ने एक लाख स्वयं रखे एवं शेष तीन लाख को दस संतानों के बीच बराबर-बराबर बांट दिया. अब बूढ़ी मां किसके साथ रहेगी? तो बेटी अंजलि मां को अपने घर ले गयी. इसके बाद मां की खबर किसी बेटे ने नहीं ली. बीच में बड़े बेटे गोविंद ने पता लगाया तो पता चला कि शांतिबाला अपने रिश्तेदार वासु साहा के साथ रहती हैं. कुछ दिनों के बाद शांतिबाला के बीमार होने पर अंजलि 95 हजार पांच सौ रुपये के साथ उन्हें गोविंद के घर छोड़ गयीं. बड़े बेटे ने मां के रुपयों से मां का इलाज कराया. ठीक होने के बाद शांतिबाला फिर अपने बेटी के घर रहने चली गयीं. फिर अचानक दो जनवरी को छोटा बेटा विमल मां को बीमार अवस्था में सिलीगुड़ी अस्पताल में छोड़ जाता है. इसके बाद विमल की कोई खबर नहीं है. फिर अंजलि ने लीगल एड फोरम के पास मां की उपेक्षा की शिकायत की.
मामला दर्ज होने के बाद अब गोविंद, निरंजन, स्वर्गीय महादेव का पुत्र गौड़ आदि ने शांतिबाला का दायित्व लेने का सहमति पत्र दाखिल किया है. लेकिन अभी उनका इलाज होना बाकी है. अब अगर बेटों की बात की जाये तो बूढ़ी मां को रखने के लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा है. गोविंद का कहना है कि अगर मां मेरे साथ रहना चाहे तो रह सकती है. निरंजन का कहना है कि मेरे घर में पर्याप्त जगह नहीं है. स्थान के अभाव की वजह से मेरा बेटा भाड़ा घर में रहता है, तो मां को कहां रखूं? शांति के अन्य बेटों व बेटियों से बात नहीं हो पायी है, लेकिन इन दोनों से पूछने पर भी किसी का नाम सामने नहीं आया है.
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