निजी अस्पतालों के ऊंचे बिल के खिलाफ खोला मोरचा

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सिलीगुड़ी. निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम की मार से सिलीगुड़ीवासी त्राहिमाम कर रहे हैं. लेकिन जिला प्रशासन इस पर खामोश है. अब अस्पतालों के प्रबंधन को सही राह पर लाने के लिए हरिमाया छेत्री मेमोरियल वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन नामक एक गैर सरकारी संगठन ने कमर कसी है. इस संगठन ने सिलीगुड़ी के 32 निजी अस्पतालों के […]

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सिलीगुड़ी. निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम की मार से सिलीगुड़ीवासी त्राहिमाम कर रहे हैं. लेकिन जिला प्रशासन इस पर खामोश है. अब अस्पतालों के प्रबंधन को सही राह पर लाने के लिए हरिमाया छेत्री मेमोरियल वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन नामक एक गैर सरकारी संगठन ने कमर कसी है. इस संगठन ने सिलीगुड़ी के 32 निजी अस्पतालों के पास प्रत्येक इलाज के खर्च की सूची बनाकर प्रकाशित करने का अनुरोध किया है.

संगठन के अध्यक्ष कृष्ण छेत्री ने बताया कि निजी अस्पतालों के विरुद्ध मोरचा खोल दिया गया है. आगामी दिनों में हम एक बड़े आंदोलन की ओर अग्रसर होंगे. यहां तक कि उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटाखटायेंगे. उल्लेखनीय है कि प्रधान नगर स्थित मेडिका नॉर्थ बंगाल क्लिनिक में गत 23 जनवरी को डुआर्स के चामुर्ची निवासी कालू विश्वकर्मा नामक एक युवक को ब्रेन हैमरेज की वजह से भर्ती कराया गया था. वह पेशे से एक साधारण गाड़ी चालक है. मेडिका की ओर से अब तक करीब साढ़े तीन लाख रुपये का बिल दिया गया है. एक गाड़ी चालक इतना रुपया कहां से चुकायेगा? श्री छेत्री का आरोप है कि बिल ना चुकाने की वजह से क्लिनिक की ओर परिजनों को रोगी से मिलने से भी रोक दिया गया है.

उन्होंने बताया कि 23 से 28 जनवरी तक के लिए मेडिका ने कालू विश्वकर्मा को 2 लाख 68 हजार रुपये का बिल दिया था. संगठन की ओर से रियायत का अनुरोध करने पर अस्पताल ने सिर्फ 12 हजार रुपये की कटौती की. इसे लेकर संगठन की ओर से प्रधान नगर थाने में मेडिका नॉर्थ बंगाल के विरुद्ध अधिक बिल देने के आरोप में मामला दर्ज कराया गया है.

श्री छेत्री ने बताया कि संगठन की ओर से सिलीगुड़ी के 32 निजी अस्पतालों से रेट चार्ट प्रकाशित करने का अनुरोध किया गया है. इसके साथ ही रोगियों व उसके परिवारों को इलाज शुरू करने से पहले काउंसिलिग के माध्यम से इलाज का पूरा खर्च बताने के लिये आवेदन किया गया है. अगर ये निजी अस्पताल आगामी दिनों में ऐसा नहीं करते तो राज्य के स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की शिकायत की जायेगी. अगर स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले में कोई उचित कदम नहीं उठायेगा, तो अंत में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जायेगा.

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