टकराव: आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर जारी, जीटीए पर और बढ़ी तकरार
सिलीगुड़ी: राज्य विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ना केवल दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र, बल्कि तराई एवं डुवार्स के इलाकों की राजनीति में अचानक उफान आ गया है. खासकर गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग की सक्रियता अचानक बढ़ गई है. राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ इन दिनों उनका छत्तीस का आंकड़ा है. यही वजह है […]
जीटीए को लेकर राज्य सरकार, केन्द्र सरकार तथा गोजमुमो के बीच मंगलवार दो फरवरी को नई दिल्ली में एक त्रिपक्षीय बैठक होनी थी. इस बैठक को टाल दिया गया है. स्वाभाविक रूप से बैठक को टाले जाने को लेकर गोजमुमो तथा राज्य सरकार के बीच तकरार बढ़ गई है और दोनों ही ओर से आरोपों एवं प्रत्यारोपों का दौर जारी है.
इस बैठक को रद्द करने के लिए गोजमुमो ने सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. स्वयं जीटीए चीफ बिमल गुरूंग ने कहा है कि जीटीए को अधिक शक्ति प्राप्त न हो, इसके लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक को रद्द करवा दिया है. यहां उल्लेखनीय है कि इस बैठक में राज्य सरकार के कई विभागों को जीटीए को हस्तांतरित करने के साथ-साथ अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने आदि पर चर्चा होनी थी. इससे पहले भी कई मौकों पर यह बैठक स्थगित की जा चुकी है. बिमल गुरूंग ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक बार त्रिपक्षीय बैठक होने के बाद केन्द्र सरकार के सामने राज्य सरकार कलई खुल जायेगी. इसलिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठक नहीं करना चाहती हैं. इतना ही नहीं, गोजमुमो के सहयोगी दल भाजपा ने भी बैठक को स्थगित करने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. दार्जिलिंग से भाजपा सांसद एसएस अहलुवालिया का कहना है कि जीटीए को पैसा न देना पड़े, इसलिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक को टलवा दिया है.
इस बीच, गोजमुमो सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी ने त्रिपक्षीय बैठक टाले जाने को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर ली है. सूत्रों ने बताया कि ना केवल दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र, बल्कि उन तमाम स्थानों पर जहां गोरखा लोगों की संख्या अधिक है, वहां इस मुद्दे को जोर-शोर से प्रचारित किया जायेगा. गोरखा लोगों को यह बताने की कोशिश की जायेगी कि राज्य सरकार ना केवल अगल गोरखालैंड राज्य की मांग का विरोधी है, बल्कि जीटीए को भी ठीक तरह से चलने नहीं देना चाहती. इस मुद्दे पर बिमल गुरूंग का कहना है कि ममता बनर्जी ने कभी पहाड़ के विकास की बात ही नहीं कही है. वह बांटों और राज करो की राजनीति कर रही हैं. यही कारण है कि गोरखा जाति के लिए अलग-अलग विकास बोर्ड बनाये जा रहे हैं. यदि ममता बनर्जी पहाड़ का विकास चाहतीं तो वह विकास कार्यों के लिए जीटीए को धन का आवंटन भी करतीं. उन्होंने साफ-साफ कहा है कि इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव में बढ़-चढ़कर उछाला जायेगा. यहां उल्लेखनीय है कि पिछली विधानसभा चुनाव में दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के तीनों विधानसभा सीटों दार्जिलिंग, कालिम्पोंग तथा कर्सियांग से गोजमुमो की जीत हुई थी. इसके अलावा डुवार्स के कालचीनी से भी गोजमुमो समर्थित विल्सन चंप्रामारी जीते थे. बाद में विल्सन चंप्रामारी तृणमूल में शामिल हो गये. उन्हें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जीटीए का चेयरमैन बना दिया है.
इसके अलावा हाल ही में कालिम्पोंग के विधायक डॉ हर्क बहादुर छेत्री गोजमुमो को अलविदा कह गये हैं. उन्होंने जनता आंदोलन पार्टी के नाम से अपनी एक नयी पार्टी बनायी है. उन्होंने भले ही अपनी अलग पार्टी बना ली हो, लेकिन गोजमुमो नेताओं का कहना है कि वह तृणमूल के लिए ही काम करेंगे. इस बीच, सूत्रों ने बताया है कि जीटीए के भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की सुगबुगाहट के साथ ही हर्क बहादुर छेत्री की भी सक्रियता बढ़ गई है. माना जा रहा है कि कालिम्पोंग से वह स्वयं चुनाव लड़ेंगे और बाकी गोरखा बहुल इलाकों में वह तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे. कल मंगलवार को उन्होंने कालिम्पोंग में पार्टी नेताओं एवं समर्थकों की एक बैठक बुलायी है. इस मुद्दे पर हर्क बहादुर छेत्री का कहना है कि विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने अभी कोई फैसला नहीं किया है. कल की बैठक में इस मुद्दे को लेकर चर्चा की जायेगी.
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