‘पहाड़ों की रानी’ फिर बनी देशी विदेशी सैलानियों की पहली पसंद

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सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग, जिसे पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है, अब केवल गरमी के मौसम में नहीं, बल्कि हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. बर्फबारी का लुत्फ उठाने इस कड़ाके की ठंड में भी दो हजार से अधिक देशी-विदेशी सैलानी पहाड़ पर रुके हुए हैं. टूर ऑपरेटर सैलानियों […]

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सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग, जिसे पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है, अब केवल गरमी के मौसम में नहीं, बल्कि हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. बर्फबारी का लुत्फ उठाने इस कड़ाके की ठंड में भी दो हजार से अधिक देशी-विदेशी सैलानी पहाड़ पर रुके हुए हैं. टूर ऑपरेटर सैलानियों के लिहाज से इस मौसम को ऑफ-सीजन मानते हैं. लेकिन इस बार दार्जिलिंग के पहाड़ों पर बार-बार हो रही बर्फबारी सैलानियों को आकर्षित कर रही है और यही वजह है कि बीते कुछ दिनों में उत्तर बंगाल भ्रमण पर आये एक हजार सैलानी पहाड़ की ओर रुख कर गये.

टूर ऑपरेटरों की मानें तो अब भी दार्जिलिंग एवं सिक्किम में दो हजार से भी अधिक सैलानी रुके हुए हैं. हालांकि विगत बुधवार के बाद पहाड़ पर नये सिरे से बर्फबारी नहीं हुई है, इसके बावजूद बर्फबारी की उम्मीद में सैलानी पहाड़ पर टकटकी लगाये बैठे हैं. इस बार दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में दो-तीन बार बर्फबारी हुई. दार्जिलिंग के संदकफू, टाइगर हिल, घूम, जलपहाड़, बतासिया लूप में हुई बर्फबारी के बाद से ही इन पर्यटन केंद्रों पर सैलानी रुके हुए हैं. इस बार जो सैलानी डुवार्स भ्रमण पर आये, वह भी बर्फबारी का लुत्फ उठाने पहाड़ की ओर रुख कर गये.

पर्यटन उद्योग से जुड़े व्यवसायियों में खुशी का मौसम

पहाड़ पर इस बार हुई बर्फबारी पर्यटन उद्योग से जुड़े व्यवसायियों के लिए खुशी का मौसम लेकर आयी है. टूर ऑपरेटरों के संगठन, ईस्टर्न हिमालय ट्रेवल्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन (एतवा) के कार्यकारी अध्यक्ष सम्राट सान्याल का कहना है कि बीते वर्ष नेपाल में आये भूकंप के आतंक का असर दार्जिलिंग पहाड़ पर भी पड़ा था. लेकिन सैलानियों के इस आतंक को इस बार की बर्फबारी ने दूर कर दिया है. उनका कहना है कि पहाड़ पर बार-बार हो रही बर्फबारी सैलानियों को लुभा रही है. अब भी दो हजार से अधिक सैलानी पहाड़ पर हैं. यह आंकड़ा आगामी अप्रैल से जून महीने तक के टूरिस्ट सीजन के लिए एक अच्छा इशारा है. इन तीन महीनों के सीजन में पहाड़ पर रिकॉर्ड भीड़ होने की संभावना है.

उन्होंने बताया कि सन 2014 में पहाड़ पर साढ़े चाल लाख से भी अधिक देशी-विदेशी सैलानियों का रिकॉर्ड आगमन हुआ था. लेकिन 2015 में सैलानियों की यह संख्या घट कर पौने तीन लाख ही रह गयी. उस साल नेपाल में 25 अप्रैल से शुरू हुए भूकंप के झटकों का असर प्रायः नवंबर महीने तक बना रहा. भूकंप के आतंक के वजह से ही दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में दुर्गा पूजा व दीपावली की छुट्टियों में भी सैलानियों ने पहाड़ की ओर रुख नहीं किया. उस दौरान पहाड़ पर होटलों की करीब 50 फीसदी बुकिंग रद्द करनी पड़ी थी और पर्यटन उद्योग को काफी नुकसान हुआ था.

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