किशनगंज में दूल्हे को कंधों पर बैठाकर पहुंची बारात, अधूरे पुल ने फिर उजागर की विकास की हकीकत

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दूल्हे को कंधों पर बैठाकर पहुंची बारात

Kishanganj News:किशनगंज में दुल्हन का घर सामने था, लेकिन रास्ता नहीं. नाव और ग्रामीणों के कंधों के सहारे पहुंचा दूल्हा.

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ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Kishanganj News: शहनाई की गूंज, बारातियों का उत्साह और नई जिंदगी की शुरुआत का सपना. सब कुछ किसी आम शादी की तरह ही था. लेकिन ठाकुरगंज के दल्लेगांव पंचायत में एक बारात ने खुशियों के बीच ऐसा दृश्य रच दिया, जिसने हजारों लोगों के दर्द को देश के सामने ला दिया. दुल्हन का घर सामने था, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं थी. नतीजा यह हुआ कि दूल्हे को पहले नाव से नदी पार कराई गई और फिर ग्रामीणों ने उसे अपने कंधों पर बैठाकर विवाह स्थल तक पहुंचाया.

जब बारात के सामने खड़ा हो गया अधूरा पुल

दिगली से दल्लेगांव पंचायत पहुंची बारात मेची नदी के किनारे आकर रुक गई. सामने करोड़ों रुपये की लागत से बना पुल खड़ा था, लेकिन उस तक पहुंचने के लिए एप्रोच सड़क नहीं थी. वाहन आगे नहीं बढ़ सकते थे. दुल्हन का घर कुछ ही दूरी पर था, लेकिन रास्ता मानो विकास की अधूरी कहानी बनकर खड़ा था.

इसके बाद ग्रामीणों ने जिम्मेदारी संभाली. दूल्हे को पहले नाव से नदी का हिस्सा पार कराया गया. आगे कीचड़ और दुर्गम रास्ता मिला तो लोगों ने उसे अपने कंधों पर बैठा लिया. सिर पर सेहरा, चेहरे पर मुस्कान और मन में सपने लिए दूल्हा ग्रामीणों के कंधों पर बैठकर अपनी मंजिल तक पहुंचा. यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया.

24 करोड़ का पुल, लेकिन आज भी नहीं मिली राह

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास योजना के तहत मेची नदी पर करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ था. लोगों को उम्मीद थी कि दशकों पुरानी समस्या खत्म हो जाएगी. वर्ष 2020 में सुखानी से दल्लेगांव तक सड़क भी बनाई गई, लेकिन भूमि विवाद के कारण एप्रोच पथ का निर्माण अधूरा रह गया.

उत्क्रमित मध्य विद्यालय दल्लेगांव से डॉक्टर फिरोज के घर तक सड़क नहीं बन सकी. इसी बीच मेची नदी ने अपनी धारा बदल ली और पुल का उपयोग लगभग असंभव हो गया. आज पुल मौजूद है, लेकिन उस तक पहुंचने का रास्ता नहीं है.

Kishanganj News: हजारों लोगों की जिंदगी पर असर

अधूरे पुल का असर सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है. दल्लेगांव, भवानीगंज, बैगनबाड़ी, तेलीभीट्टा और पाठामारी समेत कई गांवों के लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है. मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई होती है. स्कूली बच्चों को जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है. बरसात में हालात और भी खराब हो जाते हैं.

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हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

लगातार उपेक्षा से परेशान होकर दल्लेगांव पंचायत की मुखिया सोगरा नाहिद ने पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से जवाब मांगा और अधूरे कार्य को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया. इसके बाद विभागीय गतिविधियां तेज हुईं. हाल ही में ग्रामीण कार्य विभाग की सर्वे टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन विडंबना यह रही कि उन्हें भी निर्माण स्थल तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा.

शादी पूरी हुई, लेकिन सवाल बाकी है

दूल्हे की बारात आखिरकार अपनी मंजिल तक पहुंच गई और विवाह की सभी रस्में भी संपन्न हो गईं. लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई. आखिर कब तक दल्लेगांव के लोग नाव, कंधों और जोखिम भरे रास्तों के सहारे अपनी जिंदगी गुजारेंगे? और कब पूरा होगा वह पुल, जिसका इंतजार सिर्फ एक पंचायत नहीं, बल्कि हजारों लोगों की उम्मीदें कर रही हैं?

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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