गोरखालैंड आंदोलन के एलान से टूर ऑपरेटर परेशान
सिलीगुड़ी. करीब तीन वर्षों तक शांत रहने के बाद एक बार फिर से दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के गोरखालैंड आंदोलन के आग में जलने की संभावना प्रबल हो गयी है. राज्य की तृणमूल सरकार के खिलाफ पहाड़ पर जीटीए में सत्तारूढ़ गोजमुमो ने मोरचा खोल दिया है और 7 अक्तूबर से अलग गोरखालैंड राज्य के निर्माण […]
खासकर सिलीगुड़ी के टूर ऑपरेटर गोरखालैंड आंदोलन के एलान के बाद से काफी परेशान हैं. इन टूर ऑपरेटरों को आने वाले पर्यटन मौसम में भारी घाटा होने की आशंका है. सिलीगुड़ी के टूर ऑपरेटरों के प्रमुख संगठन ऑरेंज के अध्यक्ष राज बसु ने कहा है कि कई वर्षों तक गोरखालैंड आंदोलन की वजह से दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में पर्यटन के कारोबार को भारी नुकसान हुआ है. जीटीए के गठन के बाद पहाड़ पर शांति थी और इसके परिणाम स्वरूप यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे थे. पिछले तीन वर्षों के दौरान हर वर्ष ही यहां पर्यटकों के आगमन में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हो रही थी. पिछले वर्ष भूस्खलन की वजह से पर्यटन पर थोड़ा असर पड़ा था. पिछले वर्ष भी पर्यटकों के आगमन में कमी आयी थी. लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से सामान्य है और लगातार पर्यटक यहां आ रहे हैं. यही वजह है कि सिलीगुड़ी के कई टूर ऑपरेटरों ने अपने कारोबार को बड़े पैमाने पर बढ़ाया है. कई लोगों ने दार्जिलिंग तथा अन्य स्थानों पर होटलों की शुरूआत की है, तो कई लोन लेकर गाड़ी खरीद चुके हैं. ऐसे में गोरखालैंड आंदोलन के शुरू होने की स्थिति में होटल कारोबारियों तथा ट्रेवल एजेंटों को काफी नुकसान होगा. यह लोग बैंकों के लोन तक नहीं चुका पायेंगे.
श्री बसु ने आगे कहा कि जब-जब गोरखालैंड आंदोलन की सुगबुगाहट हुई है, तब-तब इसकी कीमत टूर ऑपरेटरों से लेकर आम लोगों को चुकानी पड़ी है. गोरखालैंड आंदोलन की वजह से पहले ही काफी पर्यटक दार्जिलिंग से मुंह मोड़ चुके हैं. देशी-विदेशी पर्यटक दार्जिलिंग आने की वजाय सिक्किम आना पसंद करते हैं. गोरखालैंड आंदोलन की वजह से 90 प्रतिशत पर्यटक सिक्किम चले जाते थे. 10 प्रतिशत पर्यटक ही दार्जिलिंग आ रहे थे. जीटीए के गठन के बाद गोरखालैंड आंदोलन की सुगबुगाहट बंद हो गयी थी और धीरे-धीरे स्थिति में सुधार हो रही थी. वर्तमान स्थिति में सिक्किम तथा दार्जिलिंग के बीच पर्यटकों का औसत 60 और 40 का है. यदि 60 प्रतिशत पर्यटक सिक्किम जाना पसंद करते हैं तो 40 प्रतिशत पर्यटक दार्जिलिंग आते हैं. श्री बसु ने आगे कहा कि आम तौर पर गोरखालैंड आंदोलन के दौरान दार्जिलिंग पहाड़ पर कई-कई दिनों तक बंद का आह्वान किया जाता है.
बंद होने की वजह से पूरा कारोबार ठप्प हो जाता है. उन्होंने गोजमुमो प्रमुख तथा जीटीए चीफ बिमल गुरुंग से गोरखालैंड आंदोलन शुरू होने की स्थिति में भी पहाड़ पर बंद नहीं बुलाने की अपील की है. श्री बसु ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बिमल गुरुंग टूर ऑपरेटरों की इस अपील को मानेंगे, क्योंकि बिमल गुरुंग स्वयं भी बंद बुलाने के पक्ष में नहीं हैं.
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