जिंदगी व मौत के बीच जूझ रहे बंद बागानों के श्रमिक

सरकार, प्रशासन व विपक्ष, कोई नहीं श्रमिकों के साथ : श्रमिक नेता बागान में बीमारी से जूझ रहे कई परिवार, पैसे के अभाव में नहीं करा पा रहे इलाज कालचीनी : डुआर्स के बंद चाय बगानों के श्रमिकों की स्थिति गंभीर होती जा रही है. प्रशासन के लाख दावों के वाबजूद भी यहां के श्रमिक […]
सरकार, प्रशासन व विपक्ष, कोई नहीं श्रमिकों के साथ : श्रमिक नेता
बागान में बीमारी से जूझ रहे कई परिवार, पैसे के अभाव में नहीं करा पा रहे इलाज
कालचीनी : डुआर्स के बंद चाय बगानों के श्रमिकों की स्थिति गंभीर होती जा रही है. प्रशासन के लाख दावों के वाबजूद भी यहां के श्रमिक विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं. डुआर्स का बंद कालचीनी और राईमाटांग चाय बागान के लगभग तीन हजार श्रमिक परिवार बेरोजगार हैं. पैसे के अभाव में बिना चिकित्सा के अब तक कई श्रमिकों की मौत हो चुकी है. अब भी कई श्रमिक इलाज के अभाव में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं.
मिली जानकारी के अनुसार बक्सा डुआर्स टी कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत कालचीनी और राईमाटांग चाय बागान विगत दो माह से बंद पड़ा है. इन दोनों चाय बागानों के श्रमिक बस्तियों में घुमने पर श्रमिकों के चेहरे की लाचारी साफ झलकती है. बंद बागान के श्रमिकों ने बताया कि बागान के श्रमिकों के लिए राज्य सत्ताधारी पार्टी या केंद्र सरकार, किसी को चिंता नहीं दिखती.
श्रमिकों का कहना है कि हमारे बागान के श्रमिक चिकित्सा के अभाव में मुंह के बल गिर रहे हैं. ऐसी ही दयनीय स्थिति बंद कालचीनी चाय बागान स्थित गोदाम लाइन इलाके में देखी गई. श्रमिक लक्ष्मी उरांव गोद में लिए नन्हे बच्चे की बीमारी के इलाज को लेकर जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ने को विवश है. पति भी किसी रोग से ग्रसित होकर लाचारी की जिंदगी जी रहे हैं.
लक्ष्मी उरांव ने बताया कि पेट के रोग से लताबाड़ी अस्पताल में भर्ती हुई थी. जहां इलाज के पश्चात बाहर से दवाइयां खरीदकर खाने को कहा गया. जिसके कारण में घर चली आई. उन्होंने कहा कि हम दिनभर में दो वक्त की जगह एक वक़्त खाकर किसी तरह गुजारा करते हैं. दवाइयां खरीदने का पैसा हमारे पास कहां से आएगा. इसलिए बाध्य होकर पेट के रोग से ग्रसित बेटे को लेकर घर में लाचार पड़ी हूं.
वहीं दूसरी ओर बंद कालचीनी चाय बागान के पीपलताला इलाके के श्रमिक हेमचंद्र कर्मकार का भी पैर टूट गया है. वे घर पर लाचार पड़े हुए हैं. उनका भी साफ कहना है कि दो महीने से हाथ में पैसे नहीं, कैसे करा सकूं अपना इलाज. वहीं बागान की वर्तमान परिस्थिति ऐसी हो चुकी है कि ढूंढा जाए तो ऐसा दृश्य प्रायः समस्त श्रमिक मोहल्ले में देखने को मिलेगी. इस विषय पर कालचीनी चाय बागान के ज्वाइंट फोरम नेता गणेश लामा ने बताया कि बागान तो बंद हो गया, लेकिन श्रमिकों के साथ कोई नहीं है.
कोई भी जनप्रतिनिधि अब तक यहां के श्रमिकों को देखने नहीं आया. प्रशासन की ओर से भी कोई नहीं आता. सिर्फ एक बार 12 किलोग्राम चावल प्रदान किया गया है. उसके पश्चात अब तक कोई अता-पता नहीं. उन्होंने फिर दोहराया कि सांसद जॉन बारला और लॉकेट चटर्जी कालचीनी चौपति में आकर बड़ी-बड़ी बातें करके चले गये. लेकिन श्रमिक मोहल्ले में घुमकर किसी ने नहीं देखा. यहां तक कि हमारे दुखों को देखने और सुनने वाला भी कोई नहीं है.
इस विषय पर कालचीनी चाय बागान के तृणमूल चाय बागान मजदूर यूनियन संगठन के सचिव ओम दास लोहार ने बताया कि बागान में बीडीओ जैसे अधिकारी भी आकर नेताओं की तरह बातें करके चले जाते हैं. लेकिन कोई काम का काम नहीं होता. ओम दास लोहार ने आरोप लगाया कि प्रशासन कुछ भी मुहैया नहीं करवा रहा.
लताबड़ी अस्पताल में जाकर बागान के श्रमिकों को सटीक उपचार नहीं मिल पा रहा. उन्होंने कहा कि मरीजों को औषधि नहीं मिल रही एवं बाहर से औषधियां खरीदने को कहा जा रहा है. उन्होंने कहा हमारा बागान बंद है, बागान के श्रमिक दाने-दाने के मोहताज है तो भला तो भला औषधि कैसे खरीद पाएंगे.
लताबाड़ी रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन असीम मजूमदार ने बताया कि बंद चाय बागान के श्रमिकों को लताबड़ी ग्रामीण अस्पताल से पूरी दवाइयां प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव रखना पड़ेगा. प्रत्येक बागान के श्रमिकों को स्वास्थ्य साथी कार्ड लेकर आना पड़ेगा. उन्होंने कहा इस विषय को लेकर पहल भी की जा रही है.
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