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कालिम्पोंग : कालिम्पोंग थाना में अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज, आदिवासी दंपती का आरोप, दबाव डालकर चुप कराया गया

Updated at : 13 Feb 2019 12:53 AM (IST)
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कालिम्पोंग : कालिम्पोंग थाना में अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज, आदिवासी दंपती का आरोप, दबाव डालकर चुप कराया गया

कालिम्पोंग : करीब दो हफ्ते पहले जलपाईगुड़ी जिले के मेटली के 11 नंबर लाइन निवासी गुलशन उरांव व ग्लोरी उरांव के एक बच्चे की गत 28 जनवरी को अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी. कालिम्पोंग जिला अस्पताल ने ‘प्राकृतिक मृत्यु’ का प्रमाणपत्र दिया था. इसके बाद शव के पोस्टमार्टम के बगैर अंतिम संस्कार कर दिया […]

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कालिम्पोंग : करीब दो हफ्ते पहले जलपाईगुड़ी जिले के मेटली के 11 नंबर लाइन निवासी गुलशन उरांव व ग्लोरी उरांव के एक बच्चे की गत 28 जनवरी को अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी. कालिम्पोंग जिला अस्पताल ने ‘प्राकृतिक मृत्यु’ का प्रमाणपत्र दिया था. इसके बाद शव के पोस्टमार्टम के बगैर अंतिम संस्कार कर दिया गया था. लेकिन अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है. उरांव दंपती ने मंगलवार को कालिम्पोंग थाने में लिखित शिकायत देकर कहा है कि उनके बेटे की अस्वाभाविक मौत हुई है.

शिकायतकर्ता माता-पिता ने कहा कि जिस प्रधान परिवार के साथ उनका बच्चा रहता था, उन लोगों ने इस मामले को प्रकाश में नहीं लाने के लिए धमकी दी थी. उराव दंपती का कहना है कि गत तीन तारीख को उन्होंने पुलिस में बच्चे की मौत पर जो बयान दिया था, वह प्रधान परिवार के दवाब में दिया था. मंगलवार को एक एनजीओ की मदद से माता-पिता कालिम्पोंग थाने पहुंचे और अपने बच्चे की मौत हो अस्वाभाविक बताकर न्याय की मांग की.
अपने नये बयान में पिता गुलशन उरांव ने कहा कि उन्हें बच्चे का शव लेने के लिए अस्पताल आने से रोक दिया गया था. उन्हें श्मशान के पास मिलने के लिए कहा गया था. शव पर हल्दी लगी हुई थी. जब इस बारे में सवाल किया गया तो प्रधान परिवार ने कहा कि शव पर हल्दी लगाने की रीत है. लेकिन जब जब मृत बच्चे की मां ने हल्दी हटायी तो खरोच के निशान दिखे.
जानकारी के मुताबिक, करीब एक साल पहले गरीबी के चलते मजबूर होकर उरांव दंपती ने चंद्रलोक में रहनेवाले डीएन प्रधान को बच्चा सौंपा था. प्रधान परिवार ने बच्चे को पढ़ाने-लिखाने व ठीक से पालन-पोषण करने की बात कही थी. लेकिन बच्चा सौंपने के बाद प्रधान परिवार का रुख बदल गया था. मां-बाप का आरोप है कि उनकी उससे ठीक से बात तक नहीं करायी जाती थी.
आध मिनट से अधिक प्रधान परिवार उन्हें बच्चे से बात नहीं करने देता था. साल साल का बच्चा गत 25 जनवरी को सुबह अस्पताल में किसी ‘रहस्यमय’ बीमारी के कारण भर्ती हुआ, जहां शाम 5.30 बजे उसने दम तोड़ दिया. जब एनजीओ के लोग पूछताछ करने पहुंचे तो डीएन प्रधान की बेटी श्रद्धांजलि प्रधान ने सच्चाई को छिपाते हुए कहा कि बच्चा सिक्किम में एक शादी में शामिल होने गया हुआ है, जबकि वह अस्पताल में था. पिता ने कहा कि अत्याचार के कारण बच्चा बीमार हुआ और मर गया.
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