सिलीगुड़ी : बड़े नोट बंद होने से छोटे पड़े कारोबारी रिश्ते, भारत-नेपाल के बीच कमजोर हुआ कारोबार, समस्या दूर करने की लिए कोई पहल नहीं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Feb 2019 4:52 AM

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संजीत कुमार, सिलीगुड़ी : नेपाल में 200, 500 एवं 2000 रुपये के नये भारतीय नोटों का चलन बंद होने से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. खासकर ट्रक चालकों, व्यापारियों, पर्यटकों को ज्यादा दिक्कत हो रही है. मनी एक्सचेंज के धंधे को भी झटका लगा है. सीमावर्ती इलाकों के कामगार व व्यवसायियों को इसका खासा […]

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संजीत कुमार, सिलीगुड़ी : नेपाल में 200, 500 एवं 2000 रुपये के नये भारतीय नोटों का चलन बंद होने से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. खासकर ट्रक चालकों, व्यापारियों, पर्यटकों को ज्यादा दिक्कत हो रही है. मनी एक्सचेंज के धंधे को भी झटका लगा है. सीमावर्ती इलाकों के कामगार व व्यवसायियों को इसका खासा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.

नेपाल में इन बड़े नोटों के बंद होने को लगभग दो माह होने को है. लेकिन इन बड़े नोटों को फिर से चालू करने को लेकर अब तक दोनों देशों के बीच किसी तरह की पहल ना होते देख प्रभावित लोगों के सब्र का बांध टूटने लगा है. नेपाल से भारत का संबंध बेटी-रोटी का भी है. दोनों देशों के लोगों के आपसी शादी-विवाह व अन्य व्यवसायिक रिश्ते भी हैं. जिससे परेशानी दोनों देशों के नागरिकों को हो रही है.

सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल और पड़ोसी राज्यों के विभिन्न जिलों से काफी संख्या में लोग नेपाल आंखों के इलाज के लिये भी जाते हैं. इलाज के लिए जाने वाले लोगों पर इसका असर पड़ रहा है. सिलीगुड़ी से नेपाल का नजदीकी बॉर्डर कांकड़भिट्ठा है, जहां से पर्यटक तथा अन्य लोग व्यवसायिक कार्यों से नेपाल की आवाजाही करते हैं.
इसके लिये उन्हें भारू (भारतीय मुद्रा) से नारू (नेपाली मुद्रा) में रूपयों को एक्सचेंज कराना पड़ता है. नोट एक्सचेंज करने वाले रवि बताते हैं कि भारतीय बड़े नोट के नेपाल में प्रचलन पर रोक से दिक्कत हो रही है. उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो गया है. नेपाल राष्ट्र बैंक में 100 रुपये के नोट कम हैं.
ऐसे में दिक्कत बढ़ गयी है. नेपाल के दमक जा रही सिलीगुड़ी की रेखा गुप्ता ने बताया कि बड़े भारतीय नोट नेपाल में नहीं लिये जा रहे हैं. नेपाली नोट लेने के लिये बट्टा ज्यादा देना पड़ रहा है. इससे प्रति सैंकड़ा करीब 20 रूपये का नुकसान हुआ, जबकि इसके पहले यह दिक्कत नहीं थी. वहीं उनके साथ जा रहे राम साह ने कहा कि भारतीय बड़े नोट को नेपाली मुद्रा में बदलने पर अब ज्यादा पैसा देना होगा. अब बड़ा नोट नेपाल ले जाने में भय भी रहता है.
दोनों देशों के लोगों के संबंधों पर पड़ रहा असर
नेपाल के साथ भारतीय लोगों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता भी जगजाहिर है. खास कर अब शादी विवाह के मौसम में दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों पर भी इसका असर देखा जा रहा है. दार्जिलिंग मोड़ के रहने वाले सुरेश प्रधान के बेटी की शादी बिरता मोड़ के रहने वाले नरेश नेवपानी के यहां तय हुयी थी. भारतीय बड़े नोट के बंद होने से उन्हें शादी में काफी परेशानी उठानी पड़ी.
नेपाल में भारतीय बड़े नोट बंद हो जाने से जरूरत के सामान समेत अन्य खर्चों के लिये भी उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ा. शादी तो किसी तरह से निपट गयी, लेकिन उन्होंने देशों के बीच हुये इस माहौल को लेकर खूब कोसा. कांकड़भिट्ठा में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली अलका छेत्री बताती हैं कि पहले जहां भारत से काफी संख्या में महिला ग्राहक सौंदर्य कार्यों से आती थीं.
लेकिन जब से बड़े नोट बंद हो गये हैं, तो ग्राहकों की संख्या में भी कमी आयी है. नेपाल के ब्यूटी पार्लरों में भारतीय पार्लर की अपेक्षा कम खर्च में बेहतर कार्य होते हैं. जिससे सीमावर्ती इलाकों के महिलाओं की पहली पसंद नेपाल ही होती है. नेपाल से माल लेकर भारतीय शहरों में आने वाले ट्रक चालकों को भी काफी परेशानी हो रही है.
सीमावर्ती बाजारों में भी रौनक नहीं
नेपाल के सीमावर्ती बाजार कांकड़भिट्ठा, बिरता मोड़ और धुलाबाड़ी में खरीदारी के लिये भारतीय ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी. खासकर जाड़े के मौसम इन बाजारों में गर्म वस्त्र की खरीदारी के लिये भारतीय ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी. नेपाल में बड़े भारतीय नोटों के प्रचलन बंद होने से इन दुकानों की रौनक भी फिकी पड़ गयी है.
धुलाबाड़ी में कपड़ों का दुकान चलाने वाले दुकानकार धीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि बड़े भारतीय नोटों के बंद होने से ग्राहकों की संख्या में काफी कमी आयी है. पहले जाड़े के मौसम में कपड़ों का यहां अच्छा कारोबार होता था,
लेकिन इस बार कारोबार काफी मंदा रहा. नेपाल-भारत सहयोग मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार वैद्य ने बताया कि नेपाल ने वर्ष 2020 को पर्यटन वर्ष घोषित कर रखा है. जिस पर अब प्रभाव पड़ेगा. नेपाल सरकार ने यह कदम किस वजह से उठाया है, अभी तक समझ में नहीं आया है. इसके लिये वैकल्पिक उपाय सरकार को खोजना चाहिये. वरना इसके अंदर आम जनता को खास करके मध्यम वर्ग व निम्न वर्ग के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी.
ट्रक चालकों को भी हो रही परेशानी
अमृतसर के ट्रक चालक शेर बहादुर सिंह ने बताया कि लखनऊ से शीशा व अन्य सामान लेकर नेपाल के भद्रपुर शहर में आना-जाना लगा रहता है. अब नेपाल में 100 रुपये के भारतीय नोट कम मिल रहे हैं. एक बार नेपाल जाने में 15 हजार रूपये का खर्च आता है. अब वहां सिर्फ 100 रूपये के चलन से परेशानी हो रही है. खासकर वहां के पेट्रोल पंपों में ईंधन लेने में दिक्कत हो रही है.
नये भारतीय बड़े नोट को रखने में भी भय रहता है, जबकि पहले ऐसी परेशानी नहीं थी. वहीं नेपाल के ट्रक चालक भी भारतीय शहरों में माल अनलोड करने के बाद बड़े भारतीय नोट लेना नहीं चाह रहे हैं. नेपाल के ट्रक चालक शिवचंद्र लामा ने बताया कि जब बड़े भारतीय नोट नेपाल में बंद हो चुके हैं, तो फिर यहां से ले जाने का क्या मतलब है. इसके लिये उन्हें ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से जिरह करनी पड़ती है.
पर्यटन व्यवसाय पर भी पड़ रहा असर
नेपाल सरकार के भारतीय बड़े नोट बंद होने से काफी संख्या में वहां जाने वाले पर्यटकों पर इसका असर पड़ेगा. जिससे नेपाल के पर्यटन व्यवसाय भी प्रभावित होंगे. मालूम हो कि नेपाल सरकार 2020 में विजिट नेपाल ईयर मनाने की तैयारी कर रहा है. सरकार को उम्मीद है कि इस दौरान काफी संख्या में विदेशी पर्यटक देश में आयेंगे. करीब 20 लाख पर्यटकों के नेपाल पहुंचने का अनुमान है.
इनमें ज्यादातर भारतीय शामिल होंगे. नेपाल सरकार के इस फैसले से वहां जाने वाले लाखों भारतीय पर्यटकों और भारत में काम करने वाले नेपाली नागरिकों पर असर पड़ेगा. नेपाल जाने वाले पर्यटकों के लिये पानीटंकी या खोरीबाड़ी में कहीं भी बड़े नोटों के बंदी की सूचना नहीं चिपकायी गयी है. जिससे भारतीय पर्यटक जानकारी के अभाव में भी बड़े नोट लेकर नेपाल चले जा रहे हैं और उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है.
सिलीगुड़ी के नेपाली रात्रि प्रहरी भी हैं परेशान
शहर में रात्रि सुरक्षा की जिम्मवारी भी काफी हद तक नेपाली चौकीदारों पर ही निर्भर है. खासकर बीच शहर के दुकानों व गली-मुहल्लों में भी नेपाल के लोग रात्रि प्रहरी की भूमिका निभाकर अपना रोजी-रोटी चलाते हैं. अब इन चौकीदारों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है.
ये चौकीदार अब 100 रूपये के नोट ही लेना चाह रहे हैं, ताकि उन्हें गृह वापसी के दौरान रूपयों से संबंधित कोई परेशानी ना झेलना पड़े. कई वर्षों से हिलकार्ट रोड समेत विधान मार्केट में दुकानों के रात्री सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे दिनेश थापा ने बताया कि अब हमलोगों पारिश्रमिक के तौर पर 100 रूपये के नोट ही लेना चाह रहे हैं.
नेपाल में बड़े भारतीय नोटों के बंद हो जाने से वहां कानूनन भय भी बना रहता है. जिससे परेशानी अब ज्यादा बढ़ गयी है. उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तो परेशानी कुछ कम है, लेकिन नेपाल के अंदर जाने पर काफी दिक्कत हो रही है. वहां के व्यापारी व अन्य लोग बड़े भारतीय नोट लेने से साफ तौर पर इंकार कर रहे हैं.
आंख के इलाज के लिए काफी संख्या में लोग जाते हैं नेपाल
नेपाल के सीमावर्ती शहर जैसे सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, नक्सलबाड़ी, इस्लामपुर समेत अन्य नजदीकी शहरों के लोग काफी संख्या में आंख के इलाज के लिये नेपाल के कांकड़भिट्टा, लहान, बिरता मोड़ व भद्रपुर जाते हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों में तो भारतीय बड़े नोट भी लिये जा रहे हैं. लेकिन नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से भीतर के शहरों में बड़े रूपये लेने में नर्सिंग होम आनाकानी करते हैं.
इसके लिये मरीजों के परिजनों को या तो अधिक रूपये देने होते हैं, नहीं तो 100 रूपये के नोट की मांग की जाती है. इससे नेपाल के नेत्रालयों पर भी इसका असर देखा जा रहा है. इसके साथ ही यहां इलाज कराने जाने वाले सिलीगुड़ी तथा अन्य स्थानों के लोगों को भी परेशानी होती है. लोगों का मानना है कि भारतीय शहरों के मुकाबले कम खर्च में आंख का बेहतर इलाज नेपाल में होता है. जिसके लिये भारतीय लोगों का आना-जाना लगा रहता है.
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