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सिलीगुड़ी : चार दिनों के बाद अपने बाड़े में लौटा तेंदुआ

Updated at : 05 Jan 2019 5:46 AM (IST)
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सिलीगुड़ी :  चार दिनों के बाद अपने बाड़े में लौटा तेंदुआ

सिलीगुड़ी : लगातार चार दिनों तक इधर-उधर की खाक छानने के बाद आखिरकार सचिन स्वयं अपने बाड़े में लौट आया है. इसके साथ ही बंगाल सफारी पार्क प्रबंधन और वन विभाग ने राहत की सांस ली है. उल्लेखनीय है कि सचिन नामक तेंदुआ मंगलवार सुबह सबको चकमा देकर अचानक अपने बाड़े से भाग गया था. […]

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सिलीगुड़ी : लगातार चार दिनों तक इधर-उधर की खाक छानने के बाद आखिरकार सचिन स्वयं अपने बाड़े में लौट आया है. इसके साथ ही बंगाल सफारी पार्क प्रबंधन और वन विभाग ने राहत की सांस ली है.
उल्लेखनीय है कि सचिन नामक तेंदुआ मंगलवार सुबह सबको चकमा देकर अचानक अपने बाड़े से भाग गया था. उसके बाद से ही वन विभाग में खलबली मच गयी थी. इ
सबीच वन विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे तेंदुआ चुपचाप अपने बाड़े में लौट आया. उसके स्वयं ही वापस लौटने की संभावना वन विभाग के पहले से ही थी. इसी कारण से उसके बाड़े के मेन गेट को खोलकर रखा गया था. तेंदुए के लिए बाड़े के अंदर ही खाने पीने की भी व्यव्स्था की गयी थी.
वन विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तेंदुए के वापस लौटने की संभावना को देखते हुए ही उसके बाड़े के मेन गेट को खोलकर रखा गया था. बाड़ के आसपास कई वनकर्मी भी घात लगाए बैठे थे.
हालांकि इस दौरान बंगाल सफारी पार्क के विभिन्न इलाकों में तेंदुए की तलाशी भी जोर शोर से की जा रही थी. दिन के करीब 4:30 बजे होंगे कि तभी सचिन को दबे पांव बाड़ के अंदर आते वन कर्मियों ने देखा.
एक बार जैसे ही तेंदुआ बाड़ के अंदर आया मेन गेट को तत्काल वन कर्मियों ने बंद कर दिया. मिली जानकारी के अनुसार तेंदुआ कुछ घायल भी है. उसके पैर तथा चेहरे पर चोट के निशान पाए गए हैं .
वन कर्मियों का मानना है कि लगातार इधर-उधर भागने की वजह से ही तेंदुआ घायल हो गया है. एक बार जब तेंदुआ बाड़ के अंदर आ गया तो सबसे पहले उसके खाने पीने की व्यवस्था की गई. उसके बाद पशु चिकित्सकों की एक टीम ने तेंदुए की चिकित्सा शुरू की. बाद में तेंदुए को बाड़ से निकाल कर एक शेल्टर होम में ले जाया गया है. दरअसल तेंदुए को पकड़ पाना इतना आसान नहीं था.
करीब 80 घंटे से भी अधिक समय से तेंदुए को पकड़ने की कोशिश की जा रही थी. यहां तक कि तेंदुए की तलाश में 4 हाथी,दो ड्रोन कैमरे, सात ट्रैप कैमरे के साथ-साथ एक सौ से अधिक वनकर्मी लगे हुए थे.
उसके बाद भी तेंदुए का पता नहीं चल रहा था. वन विभाग सूत्रों के अनुसार लगातार तीन दिनों तक ऑपरेशन के बाद भी तेंदुए का पता नहीं चलने के बाद बृहस्पतिवार अधिकारियों की एक बैठक हुई. उसी बैठक में एक विशेष रणनीति पर विचार किया गया. अधिकारियों का मानना था कि शायद तेंदुआ बंगाल सफारी पार्क से बाहर नहीं गया है.
एक-दो दिन में भूख लगने पर वह स्वयं खाने की तलाश में बाड़ में वापस आ सकता है. वन अधिकारियों की यही तरकीब काम कर गई. इसी तरकीब को ध्यान में रखते हुए तेंदुए के बाड़ के मुख्य गेट को रात में ही खोल दिया गया.
जबकि एक दर्जन से अधिक प्रशिक्षित वनकर्मी बाड़ के आसपास तैनात कर दिए गए. हालांकि बृहस्पतिवार रात तक वनकर्मी सचिन के आने का इंतजार करते रहे,लेकिन वह नहीं आया. आज शुक्रवार को भी दिन भर तेंदुए के वापस आने के इंतजार में वन कर्मी लगे रहे. शाम करीब 4:30 बजे होंगे.
तेंदुआ अचानक बाड़ के अंदर आ गया. इसे देख वन कर्मियों की बांछे खिल गई. तेंदुए की तलाशी के लिए जो ऑपरेशन शुरू किया गया था उसे तत्काल रोक दिया गया. के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गयी. बंगाल सफारी पार्क के अतिरिक्त निदेशक असीम कुमार साह ने बताया है कि पहले दिन से ही लग रहा था कि तेंदुआ कहीं बाहर नहीं गया है .
देर सबेर खाने की तलाश में उसे वापस लौटना ही होगा. उनकी यही तरकीब काम कर गई और तेंदुआ वापस लौट आया. इस बीच फरार तेंदुए के पकड़े जाने के बाद बंगाल सफारी पार्क को फिर से आम लोगों के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है.
इस महीने की 1 तारीख को जब तेंदुआ भागा था तो उस दिन बंगाल सफारी पार्क को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. हालांकि उसके अगले दिन कार सफारी की शुरुआत कर दी गई थी.
ऐसे बंगाल सफारी पार्क प्रबंधन ने कल शनिवार से कार सफारी के साथ-साथ एलीफेंट सफारी एवं लेपर्ड सफारी फिर से खोलने की घोषणा पहले ही कर दी थी. लेकिन अब तेंदुए के पकड़े जाने के बाद लोग पैदल भी पार्क के अंदर घूम सकते हैं. दूसरी ओर विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के वन मंत्री विनय कृष्ण बर्मन शनिवार को बंगाल सफारी पार्क के दौरे पर आ
रहे हैं.
वह यहां अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे. यहां यह भी बता दें कि मंगलवार को तेंदुआ फरार हुआ और बुधवार से कॉम्बैट ऑपरेशन के तर्ज पर उसकी तलाशी शुरू की गयी थी. इतना ही नहीं तेंदुए को खोजने के लिए दो ड्रोन कैमरे की भी सहायता ली गई.
चार हाथ भी जल्दापाड़ा से लाकर तेंदुए को खोजने में लगाये गए थे. काफी तलाश के बाद भी तेंदुए के नहीं मिलने से वन विभाग के अधिकारी एवं बंगाल सफारी पार्क प्रबंधन के लोग काफी परेशान थे. तेंदुए को पकड़ने के 10 पिंजरे लगाए थे. उसके पकड़े जाने के बाद पिंजरे को हटाने का काम भी शुरू हो गया है.
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