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शिशु मंदिर के बोर्ड पर बदला इस्लामपुर का नाम, मान्यता रद्द

Updated at : 17 Nov 2018 5:33 AM (IST)
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शिशु मंदिर के बोर्ड पर बदला इस्लामपुर का नाम, मान्यता रद्द

इस्लामपुर : अपनी मर्जी से उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर शहर का नाम बदलकर ‘ईश्वरपुर’ कर देनेवाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक संस्था के स्कूल पर पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कड़ी कार्रवाई की है. बोर्ड ने इस्लामपुर के सरस्वती शिशु मंदिर एवं सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है. […]

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इस्लामपुर : अपनी मर्जी से उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर शहर का नाम बदलकर ‘ईश्वरपुर’ कर देनेवाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक संस्था के स्कूल पर पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कड़ी कार्रवाई की है. बोर्ड ने इस्लामपुर के सरस्वती शिशु मंदिर एवं सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मान्यता रद्द करने के निर्णय की जानकारी इ-मेल के जरिये जिला विद्यालय निरीक्षक (माध्यमिक) को भेज दी गयी है.
जानकारी के मुताबिक, स्कूल के बोर्ड और वाहन पर इस्लामपुर की जगह ईश्वरपुर लिख दिया गया है. इसे लेकर पहले इलाके में सुगबुगाहट शुरू हुई और देखते-देखते मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया.
इसके बाद माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस पर संज्ञान लिया और स्कूल की मान्यता रद्द कर दी. स्थानीय सूत्रों ने बताया कि आरएसएस से जुड़े संगठन काफी दिनों इस्लामपुर की जगह ईश्वरपुर नाम इस्तेमाल कर रहे हैं. विश्व हिंदू परिषद ने अपने इस्लामपुर स्थित कार्यालय पर ईश्वरपुर ही लिख रखा है.
केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद से बंगाल में भाजपा और संघ की गतिविधियां बढ़ गयी हैं. इसके साथ हिंदुत्ववादी संगठनों ने इस्लामपुर को ईश्वरपुर घोषित करने की मुहिम भी तेज कर दी है. 2017 में राज्य में पहली बार भाजपा और संघ से जुड़े संगठनों ने रामनवमी पर बड़े पैमाने पर शोभायात्राएं निकालीं. इसे लेकर इस्लामपुर को भी भगवा झंडों से पाट दिया गया था और जगह-जगह ‘ईश्वरपुर’ के बैनर टांग दिये गये थे.
लेकिन जब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त सरस्वती शिशु मंदिर व विद्या मंदिर के बोर्ड पर भी इस्लामपुर हटाकर ईश्वरपुर लिख दिया गया, तो बोर्ड ने मान्यता रद्द करने का कदम उठा लिया.
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि किसी शहर का नाम बदलने का अधिकार राज्य सरकार को है, जबकि राज्य का नाम बदलने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. यदि कोई व्यक्ति या संस्था अपनी मर्जी से किसी जगह का नाम बदलता है, तो यह गैरकानूनी है और सरकार उस पर कार्रवाई कर सकती है. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इ-मेल भेज जिला निरीक्षक को फैसले से अवगत कराया
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