ऐतिहासिक महेश रथयात्रा आज, 622 वर्षों से यहां निकल रही है जगन्नाथ रथयात्रा
Author Prabhat khabar digital desk
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हुगली : देश के प्राचीनतम ओड़िशा जगन्नाथ रथयात्रा के बाद दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के श्रीरामपुर के महेश की रथयात्रा है. यही नहीं महेश केे जगन्नाथ मंदिर को हेरिटेज घोषित कर दिया गया है. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष महेश की रथयात्रा के 622 साल पूरे हो रहे हैं. रथयात्रा के […]
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हुगली : देश के प्राचीनतम ओड़िशा जगन्नाथ रथयात्रा के बाद दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के श्रीरामपुर के महेश की रथयात्रा है. यही नहीं महेश केे जगन्नाथ मंदिर को हेरिटेज घोषित कर दिया गया है. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष महेश की रथयात्रा के 622 साल पूरे हो रहे हैं. रथयात्रा के लिए चंदननगर पुलिस कमिश्नर और ग्रामीण पुलिस की ओर से सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किये गये हैं.
महेश की रथयात्रा के बारे में जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी सोमेन अधिकारी का कहना है कि यहां का रथ पहले पूरी तरह लकड़ी का बना होता था. इसके बाद कोलकाता स्थित श्यामबाजार केे जमींदार बसु परिवार ने 132 साल पहले इस रथ को मार्टिन वर्न कंपनी के जरिए लोहे से निर्मित करवाया. तब से इस रथ की देखभाल बसु परिवार ही करता आ रहा है. तब इस रथ के निर्माण में 20 हजार रुपये खर्च आये थे.
नौ चूड़ावाली इस रथ की उचांई 50 फुट और वजन 125 टन है. इसमें बड़े-बड़े बारह चक्के लगे हुए हैं. रथ को पुरानी परंपरा के तहत रस्सी बांधकर आज भी खींचा जाता है. ऐतिहासिक इस रथयात्रा को देखने वाले लोगों में श्री चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस, रवींद्र नाथ टैगोर जैसे विशिष्ट व्यक्तिों का नाम उल्लेखनीय है. इस दौरान यहां एक महीना तक मेला भी लगता है.
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