दार्जिलिंग-सिक्किम एकीकरण बेहतर उपाय : भरत दोग
Updated at : 04 Jul 2018 1:50 AM (IST)
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दार्जिलिंग. पश्चिम बंगाल सरकार ने दार्जिलिंग के भूभाग को सिक्किम के होने का श्वेत पत्र पहले ही जारी कर चुका है. परंतु इसके बावजूद भी यहां के लोगों को ये बातें समझ में नहीं आ रही है. दार्जिलिग-सिक्किम एकीकरण ही सबसे बेहतर उपाय है. उक्त बातें मंगलवार को गोर्खा राष्ट्रीय कांग्रेस ने कही है. स्थानीय […]
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दार्जिलिंग. पश्चिम बंगाल सरकार ने दार्जिलिंग के भूभाग को सिक्किम के होने का श्वेत पत्र पहले ही जारी कर चुका है. परंतु इसके बावजूद भी यहां के लोगों को ये बातें समझ में नहीं आ रही है. दार्जिलिग-सिक्किम एकीकरण ही सबसे बेहतर उपाय है. उक्त बातें मंगलवार को गोर्खा राष्ट्रीय कांग्रेस ने कही है.
स्थानीय दार्जिलिंग प्रेस गिल्ड में पत्रकारो को संबोधित करते हुये गोर्खा राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भरत दोग ने कहा कि 1986 में पश्चिम बंगाल सरकार ने दार्जिलिंग के भूभाग को सिक्किम का होने पर श्वेत पत्र जारी कर चुका है. इसलिये बंगाल से अलग होने का सबसे बेहतर उपाय सिक्किम-दार्जिलिंग एकीकरण ही होगा.
दार्जिलिंग के लोगों के लिए इससे अच्छा कुछ भी नहीं है. 1986 में सुवास घीसिंग ने गोर्खालैंड आन्दोलन शुरू किया था और 1988 में दार्जिलिंग गोर्खा पार्वतीय परिषद पर समझौता किया था. इसके बाद 2007 में विमल गुरूंग ने गोर्खालैंड आन्दोलन शुरू किया. 2011 में गोर्खालैंड क्षेत्रीय प्रशासन पर समझौता किया. विमल गुरूंग के गोर्खालैंड क्षेत्रीय प्रशासन में गोर्खालैंड केवल नाम मात्र ही है. श्री दोग ने कहा कि गोर्खा राष्ट्रीय कांग्रेस ने सिक्किम एकीकरण के अलावे कोई भी मुद्दा नहीं उठाया है. अपने मुद्दे पर पार्टी आज तक अडिग है.
श्री दोग ने कहा कि कुछ लोग सिक्किम दार्जिलिंग एकीकरण नहीं होने की बातें कहते हैं. परंतु कहने से कुछ नहीं होगा. सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने भी सिक्किम-दार्जिलिंग एकीकरण नहीं होने की बात कहते है. भारत सरकार सिक्किम दार्जिलिंग एकीकरण करने की मुड में है. इसके लिये जनता को जागरूकता होना जरूरी है.
सिक्किम दार्जिलिंग एकीकरण होने से ग्रेटर सिक्किम बन जायेगा. पवन कुमार चामलिंग सिक्किम में 25 सालों से शासन कर रहे हैं. लेकिन चामलिग ने दिल्ली में तहलका मचाने वाला कोई नेता पैदा नहीं किया. केन्द्र में यूपीए सरकार के समय तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था. तेलंगाना और दार्जिलिंग की ऐतिहासिक अवस्था एक ही तरह है. इसलिये उस दौरान यूपीए सरकार ने सिक्किम-दार्जिलिंग एकीकरण का संकेत दिया था. परंतु हमारे नेताओं ने इसका विरोध किया था.
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