नौ साल से लापता बेटी के मिलने की खुशी पर भारी पड़ी मुफलिसी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 Mar 2018 5:27 AM (IST)
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पुत्री को सलामत देख आदिवासी दंपती की आंखों से छलके आंसू पर गरीबी के कारण घर ले जाने में जतायी असमर्थता जलपाईगुड़ी : एक मां-बाप को नौ साल बाद अपनी लापता बेटी होम में मिली, लेकिन गरीबी के कारण उन्होंने बेटी को होम में ही रखने का फैसला किया. अलीपुरद्वार जिले के फालाकाटा के दक्षिण […]
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पुत्री को सलामत देख आदिवासी दंपती की आंखों से छलके आंसू
पर गरीबी के कारण घर ले जाने में जतायी असमर्थता
जलपाईगुड़ी : एक मां-बाप को नौ साल बाद अपनी लापता बेटी होम में मिली, लेकिन गरीबी के कारण उन्होंने बेटी को होम में ही रखने का फैसला किया.
अलीपुरद्वार जिले के फालाकाटा के दक्षिण खयेरबाड़ी के सियालडांगा के मुंडा परिवार की बेटी नौ साल पहले वीरपाड़ा से दिल्ली जाते समय लापता हो गई थी. अभी पता चला है कि 16 वर्षीय यह किशोरी जलपाईगुड़ी के अनुभव होम में रहती है. उसके साथ लापता हुई उसके मामा की बेटी भी इसी होम में उसके साथ है. दोनों बीते सात सालों से अनुभव होम की आवासिक हैं. दोनों बहनें जलपाईगुड़ी शहर के दो अलग-अलग स्कूलों में सातवीं कक्षा में पढ़ती हैं. गुरुवार को डुवार्स के एक समाजसेवी साजू तालुकदार के माध्यम से दुर्गा मुंडा और सोनी मुंडा ने जब अपनी बेटी को देखा तो उनकी आंखें छलक आयीं.
दुर्गा और सोनी मुंडा की माली हालत बेहद खराब है. दोनों अभी दिल्ली में दिहाड़ी मजदूर का काम करते हैं. घर में एक बेटी तथा एक बेटा है. इसमें से बेटी की शादी हो चुकी है. अपनी बेटी को नौ वर्ष बाद पाकर मां उसे गले लगकर काफी देर तक रोती रही. दुर्गा ने बताया कि नौ साल पहले अपनी बेटी को एक रिश्तेदार के घर घुमने भेजा था.
कानपुर स्टेशन से ही दोनों बेटियां लापता हो गईं. काफी दिनों तक खोजबीन की गई, लेकिन कोई पता नहीं चला. बेटियों के नहीं मिलने से दोनों पति-पत्नी काफी हताश थे. बेटियों को पाने के लिए कई मंदिरों में मन्नतें भी मांग चुके हैं.
एक सप्ताह पहले जलपाईगुड़ी के अनुभव होम के अध्यक्ष चंदना घोष ने उन्हें बेटियों को मिलने की जानकारी दी. अपनी बेटी को पाकर वह बेहद खुश हैं. दुर्गा मुंडा ने बताया है कि वह दोनों ही लोग मजदूरी के लिए दूसरे स्थान पर रहते हैं. कभी दिल्ली या किसी दूसरे राज्यों में जाकर मेहनत-मजदूरी करते हैं.
इसी कारण से अपने बच्चों को रिश्तेदार के घर रख देते थे. अभी भी घर की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह बेटी को पढ़ा-लिखा सकें. उनकी इच्छा बेटी को अनुभव होम में ही रखने की है और यहीं वह अपनी पढ़ाई-लिखाई करे. लेकिन इससे पहले वह अपनी बेटी को घर ले जाना चाहते हैं. सीडब्ल्यूसी की अनुमति लेने के लिए ही यहां आये हैं.
होम में रखकर ही पढ़ना चाहती किशोरी
किशोरी ने भी कहा कि वह होम में ही रहकर पढ़ाई करना चाहती है. घर जाकर कुछ दिनों तक मां-बाप के साथ रहेगी और फिर इस होम में लौट आयेगी. होम के अधिकारियों का भी कहना है कि यह एक अच्छा निर्णय है. अनुभव होम की कॉर्डिनेटर दीपाश्री राय ने बताया कि किशोरी के पढ़ने की पूरी व्यवस्था की जायेगी.
जलपाईगुड़ी सीडब्ल्यूसी ने मदद का दिया आश्वासन
दूसरी ओर जलपाईगुड़ी सीडब्ल्यूसी ने भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. सीडब्ल्यूसी के सदस्य सुबोध भट्टाचार्य ने बताया कि वह लोग मुंडा दंपती की हर तरह की मदद कानून के अनुसार करने के लिए तैयार हैं. अगर बच्ची घर में रहना चाहती है तो घर में भी रह सकती है या होम में रह कर पढ़ाई करे, तो इसकी पूरी व्यवस्था की जायेगी.
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