सिलीगुड़ी : हादसे के शिकार राकेश को मिली नयी जिंदगी

Published at :29 Mar 2018 9:15 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : हादसे के शिकार राकेश को मिली नयी जिंदगी

पांच वर्षों से चलने-फिरने में था असमर्थ समाजसेवी दिलीप बर्मन और डॉ रुद्रनाथ ने की युवक की मदद सिलीगुड़ी : तकरीबन पांच वर्ष पहले एक हादसे के शिकार होने के बाद चलने-फिरने में असमर्थ हो चुके 30 वर्षीय राकेश लिंबु को समाजसेवी दिलीप बर्मन के आर्थिक सहयोग और सिलीगुड़ी के पूर्व विधायक सह चिकित्सक डॉ […]

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पांच वर्षों से चलने-फिरने में था असमर्थ
समाजसेवी दिलीप बर्मन और डॉ रुद्रनाथ ने की युवक की मदद
सिलीगुड़ी : तकरीबन पांच वर्ष पहले एक हादसे के शिकार होने के बाद चलने-फिरने में असमर्थ हो चुके 30 वर्षीय राकेश लिंबु को समाजसेवी दिलीप बर्मन के आर्थिक सहयोग और सिलीगुड़ी के पूर्व विधायक सह चिकित्सक डॉ रुद्रनाथ भट्टाचार्य के मदद से नयी जिंदगी मिली है. दोनों के सहयोग से राकेश इलाज के लिए इसी महीने के सात मार्च को कोलकाता रवाना हुआ. वहां पीजी अस्पताल में 15 दिनों तक उसका इलाज हुआ.
काफी हद तक अब वह स्वस्थ होकर घर लौट चुका है. बुधवार को सिलीगुड़ी से सटे माटीगाड़ा के कदमतला के चानवार जोत में राकेश के घर पहुंचकर दिलीप बर्मन व डॉ भट्टाचार्य ने उससे मुलाकात की. एक समय जिंदगी की कठिन लड़ाई हार चुकने को मजबूर राकेश लिंबु ने दोनों को उसे नयी जिंदगी देने के लिए शुक्रिया अदा किया. उसने बताया कि अब वह पहले से काफी हद तक स्वस्थ है.
पूरी तरह चलने-फिरने के लिए अब उसे हर रोज फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह कोलकाता के डॉक्टरों ने दी है. यह सुनकर दिलीप बर्मन एक बार फिर उसे हर रोज फिजियोथेरेपी करवाने और अन्य सभी तरह के चिकित्सीय सहयोग करवाने का भरोसा भी दिया है. डॉ भट्टाचार्य ने बताया कि दिलीप से ही उन्हें कुछ रोज पहले जानकारी मिली थी कि एक हादसे के शिकार के बाद राकेश की जिंदगी दिन-प्रतिदिन खराब हो रही है.
चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ होने के बावजूद वह किसी तरह गाड़ी चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है. अगर उसका सही तरीके से इलाज किया जाये तो उसकी नारकीय जिंदगी वापस ठीक हो सकती है. डॉ भट्टाचार्य का कहना है कि जब राकेश का जांच किया तो उसे बेहतर इलाज के लिए कोलकाता के पीजी में पूरा इंतजाम करवाया. वहीं, राकेश का कहना है कि उसके इलाज में आर्थिक तंगी रोड़ा बनी हुई थी.
वह कभी भी अपने दम इलाज नहीं करा पाता और एक समय जिंदगी की लड़ाई से पूरी तरह मायूस हो चुका था. कभी-कभी मौत को गले लगाने की भी इच्छा प्रबल होने लगी थी. राकेश का कहना है कि कुछ दिन लगातार फिजियोथेरेपी करवाने के बाद वह पूरी तरह चल फिर सकेगा और अपने परिवार का अब वह अच्छी तरह भरण-पोषण कर पाने में भी सक्षम हो जायेगा.
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