आक्रोश: अस्थायी ब्रिज तोड़ने पहुंची टीम का हुआ विरोध, हंगामे के बाद बैरंग लौटी

Published at :08 Nov 2017 10:03 AM (IST)
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आक्रोश: अस्थायी ब्रिज तोड़ने पहुंची टीम का हुआ विरोध, हंगामे के बाद बैरंग लौटी

सिलीगुड़ी: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा महानंदा नदी पर दिये गए निर्देश के कारण नदी के तटवर्ती इलाके में कई प्रकार की समस्याएं सामने आ रही है. पहले एनजीटी के निर्देश पर भारी घमसान के बाद छठ पूजा तो शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया. अब जिला प्रशासन ने नदियों के उपर बने अस्थायी ब्रिज के […]

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सिलीगुड़ी: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा महानंदा नदी पर दिये गए निर्देश के कारण नदी के तटवर्ती इलाके में कई प्रकार की समस्याएं सामने आ रही है. पहले एनजीटी के निर्देश पर भारी घमसान के बाद छठ पूजा तो शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया. अब जिला प्रशासन ने नदियों के उपर बने अस्थायी ब्रिज के खिलाफ अभियान छेड़ा है, जबकि इसी अस्थायी ब्रिज पर लोगों के दैनिक जीवन को निर्भर देखकर प्रशासन के भी पसीने छूट रहे हैं. लोग अस्थायी ब्रिज को तोड़ने से पहले स्थायी पुल बनवाने की मांग पर अडिग हैं.

उल्लेखनीय है कि नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए एनजीटी ने वर्ष की शुरूआत में ही एक निर्देश जारी किया था. जिसमें कहा गया है कि नदी की धारा को किसी भी सूरत में बाधित की जानी चाहिए. इसके लिए नदियों पर अस्थायी पुल का निर्माण नहीं होना चाहिए. प्रतिमा विसर्जन आदि पर भी दिशा-निर्देश दिये गये हैं.

छठ पूजा के बाद जिला प्रशासन ने महानंदा नदी पर बने अस्थायी ब्रिज के खिलाफ मुहिम तेज कर दी है. सोमवार को ही सिलीगुड़ी पांच नंबर वार्ड रामघाट इलाके में बने बांस के अस्थायी ब्रिज को हटा दिया. यह ब्रिज आधे बने पांच नंबर महानंदा पुल का विकल्प था. इसके बाद मंगलवार को शहर से सटे माटीगाड़ा ग्राम पंचायत के नौकाघाट इलाके में बलासन नदी पर बने अस्थायी ब्रिज को उखाड़ फेंकने के लिए जिला प्रशासन की टीम पहुंची. लेकिन स्थानीय लोगों के हठ के सामने अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा. नौकाघाट इलाके में बने बांस के इस ब्रिज की एक अलग ही कहानी है. यह ब्रिज माटिगाड़ा ग्राम पंचायत के अंतर्गत बसे कई गांव के निवासियों के दैनिक जीवन का आसरा है. स्थानीय निवासी तपन साहा के पूर्वजों ने करीब 40 वर्ष पहले अस्थायी ब्रिज बनाकर लोगों को राहत दी थी. तपन साहा आज भी इस ब्रिज की देखरेख करते हैं.

करीब सात से आठ गांव के लोगों को आने-जाने के लिए यही एकमात्र ब्रिज है. पिछले कई वर्षों से स्थायी ब्रिज की मांग करने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ. प्रत्येक वर्ष बारिश में नदी के तेज बहाव में बांस का यह ब्रिज टूट जाता है. उस समय लोगों को इस पार, उस पार पहुंचाने के लिए तपन साहा स्वयं नौका चलाते हैं. जबकि नदी का जल स्तर सामान्य होने पर वे बांस का अस्थायी पुल को भी बनाते हैं.

अगस्त महीने में हुयी भारी बारिश के बाद उन्होंने इस बार भी अस्थायी ब्रिज का निर्माण किया. मंगलवार को जिला प्रशासन की टीम उसी अस्थायी ब्रिज को तोड़ने पहुंची. तपन साहा ने भी प्रशासन के कार्य में अड़ंगा नहीं लागाया. लेकिन स्थानीय लोग ने बांस के ब्रिज को तोड़ने से पहले स्थायी पुल बनाने की हठ बांध ली. स्थानीय लोगों ने बताया कि यह अस्थायी ब्रिज उनके दैनिक जीवन का आसरा है. पिछले कई वर्षों से वे लोग यहां एक पक्का पुल बनाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन अब तक कोई काम नहीं हुआ. जब तक प्रशासन स्थायी ब्रिज नहीं बना देते तबतक इस अस्थायी बांस के ब्रिज को तोड़ने भी नहीं देंगे. आवश्यकता पड़ने पर गांव के सभी लोग आंदोलन पर उतरेंगे. गांव वालों की हठ देखकर जिला प्रशासन की टीम वापस लौट गयी.

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