एनआइए के आने से पूरे पहाड़ पर खलबली, प्रशासन की उड़ी नींद, सहेजी जा रहीं आंदोलन की फाइलें

Published at :07 Nov 2017 10:51 AM (IST)
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एनआइए के आने से पूरे पहाड़ पर खलबली, प्रशासन की उड़ी नींद, सहेजी जा रहीं आंदोलन की फाइलें

सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग. गोरखालैंड आंदोलन के दौरान दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर हुए बम विस्फोट की घटना की जांच के साथ ही दार्जिलिंग सदर थाने के एसआइ अमिताभ मल्लिक मुठभेड़ कांड की जांच के लिए भी नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआइए) की तीन सदस्यीय टीम के दार्जिलिंग आने के बाद पूरे पर्वतीय क्षेत्र में खलबली मची […]

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सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग. गोरखालैंड आंदोलन के दौरान दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर हुए बम विस्फोट की घटना की जांच के साथ ही दार्जिलिंग सदर थाने के एसआइ अमिताभ मल्लिक मुठभेड़ कांड की जांच के लिए भी नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआइए) की तीन सदस्यीय टीम के दार्जिलिंग आने के बाद पूरे पर्वतीय क्षेत्र में खलबली मची हुई है.

खासकर जिला प्रशासन के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है तथा आंदोलन से जुड़े तमाम फाइलों को जमा करने का काम शुरू हो गया है. हालांकि इस मामले में ना तो पुलिस और ना ही प्रशासन के अधिकारी कुछ भी कहना चाह रहे हैं. दार्जिलिंग के पुलिस अधीक्षक अखिलेश चतुर्वेदी से जब इस मामले को लेकर बातचीत की गई, तो उन्होंने साफ-साफ कहा कि एनआइए के संबंध में उनके पास कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.

इस बीच, विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एनआइए की तीन सदस्यीय टीम दार्जिलिंग तो पहुंच गई है, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन से किसी भी प्रकार का कोई संपर्क नहीं साधा है. यह लोग कहां है, इसकी भी जानकारी किसी के पास नहीं है. हालांकि पुलिस के तमाम आलाधिकारी सोमवार को दिन भर भागमभाग करते रहे. सूत्रों का कहना है कि एनआइए का गठन अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआइ के तौर पर की गई है. भले ही यह एजेंसी केन्द्र सरकार के अधीन हो, लेकिन जांच में केन्द्र सरकार भी दखल नहीं दे सकती. यह एक स्वतंत्र एजेंसी के रूप में काम करती है और आतंकवाद एवं नक्सलवाद से संबंधित तमाम मामलों की जांच कर सकती है.

एनआइए सूत्रों का कहना है कि फिलहाल दार्जिलिंग में पिछले कुछ महीनों में गोरखालैंड आंदोलन के दौरान बम विस्फोट के साथ-साथ पुलिस फायरिंग आदि की घटनाओं से संबंधित तमाम कड़ियों को जोड़ने का काम किया जा रहा है. इसीलिए अभी जिला प्रशासन से किसी भी दस्तावेज के लिए संपर्क नहीं साधा गया है. यहां उल्लेखनीय है कि गोरखालैंड आंदोलन के दौरान दार्जिलिंग तथा कालिम्पोंग में बम विस्फोट की घटना घटी थी. इसके अलावा पुलिस फायरिंग आदि की घटनाओं में 13 आंदोलनकारी मारे जा चुके हैं. इस दौरान गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरूंग के सुरक्षा गार्डों के साथ मुठभेड़ के दौरान एसआइ अमिताभ मल्लिक शहीद हो गये थे.

गोजमुमो तथा विमल गुरूंग इन तमाम मामलों की जांच एनआइए तथा सीबीआई से कराने की मांग कर रहे थे. आखिरकार केन्द्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी. विमल गुरूंग अभी भी भूमिगत हैं. पुलिस तथा सीआइडी उनको पकड़ने की कोशिश कर रही है. विमल गुरूंग ने अपने अज्ञात ठिकाने से एनआइए की टीम का दार्जिलिंग में आने का स्वागत किया है. क्रामाकपा के केन्द्रीय प्रवक्ता गोविंद छेत्री ने भी एनआइए की टीम के आने का स्वागत किया है.

किन-किन मामलों की होगी जांच
केंद्रीय एजेंसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एनआइए की टीम दार्जिलिंग में गोरखालैंड आंदोलन के दौरान फायरिंग मामले के साथ ही विमल गुरूंग तथा अन्य गोजमुमो नेताओं पर लगाये गये आतंकवाद तथा यूएपीए एक्ट की भी जांच करेगी. सूत्रों ने बताया कि विमल गुरूंग सहित गोजमुमो के कई नेताओं के खिलाफ यूएपीए के तहत मामले दर्ज किये गये हैं. इसके बाद जहां विमल गुरूंग भूमिगत हो गये हैं, वहीं दूसरी ओर कई गोजमुमो नेताओं की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. जबकि इसी धारा के तहत गोजमुमो के बागी नेता तथा जीटीए प्रशासनिक बोर्ड के चेयरमैन विनय तमांग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. सूत्रों ने आगे बताया कि पुलिस के सब-इंस्पेक्टर शहीद अमिताभ मल्लिक मामले की भी जांच की जायेगी.
विनय शिविर में भी खलबली
एनआइए के दार्जिलिंग आने की खबर से विनय तमांग शिविर में भी खलबली मची हुई है. यदि यह साबित हो जाता है कि बम विस्फोट आदि के मामले में गोजमुमो नेताओं का हाथ था, तो सिर्फ विमल गुरूंग ही नहीं, बल्कि उन तमाम नेताओं की गिरफ्तारी होगी जिनके खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं. विनय तमांग के खिलाफ भी इसी धारा के तहत मामले दर्ज किये गये हैं. यदि एनआइए के जांच में यह साबित हो गया कि बम विस्फोटों की घटना में गोजमुमो नेताओं के हाथ नहीं हैं, तो इससे विनय तमांग के साथ ही विमल गुरूंग एवं अन्य गोजमुमो नेताओं को राहत मिलेगी.
एनआइए की शक्ति
एनआइए के पास असीम अधिकार है. किसी भी प्रकार के दस्तावेज आदि लेने के साथ ही किसी की गिरफ्तारी के लिए किसी से भी इजाजत लेने की कोई जरूरत नहीं है. जिला प्रशासन के अधिकारी यदि संबंधित दस्तावेज नहीं देते हैं तो एनआइए उनके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है.
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