डेंगू से हालात बेकाबू: मरीजों को बेड नहीं, जमीन पर चिकित्सा

Published at :01 Nov 2017 10:28 AM (IST)
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डेंगू से हालात बेकाबू: मरीजों को बेड नहीं, जमीन पर चिकित्सा

सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी शहर में डेंगू से हालात बेकाबू हो रहे हैं. धीरे-धीरे इस बीमारी ने महामारी का रूप लेना शुरू कर दिया है. अबतक करीब आधा दर्जन रोगियों की मौत हो गयी है और करीब 2000 से भी अधिक लोगों के बीमार होने की खबर है.आलम यह है कि सरकारी अस्पताल की कौन कहें मंहगे-मंहगे […]

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सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी शहर में डेंगू से हालात बेकाबू हो रहे हैं. धीरे-धीरे इस बीमारी ने महामारी का रूप लेना शुरू कर दिया है. अबतक करीब आधा दर्जन रोगियों की मौत हो गयी है और करीब 2000 से भी अधिक लोगों के बीमार होने की खबर है.आलम यह है कि सरकारी अस्पताल की कौन कहें मंहगे-मंहगे निजी अस्पतालों में भी रोगियों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं है.खासकर सरकारी अस्पतालों की हालत तो काफी खराब है.सिलीगुड़ी जिला अस्पताल भी इस समस्या से अछूता नहीं है. यहां आलम यह है कि रोगियों को जमीन पर चिकित्सा कराने के लिए भी डॉक्टरों तथा अधिकारियों की काफी मिन्नतें करनी पड़ती है.

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी जिला अस्पताल मेल तथा फीमेल वार्ड पूरी तरह से रोगियों से भरा हुआ है. इसमें से अधिकांश डेंगू के लक्षण या बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल में भर्ती हुए है.इस बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने ना केवल सिलीगुड़ी के सभी 47 वार्डों अपितु ग्रामीण इलाकों को भी अपने चपेट में ले लिया है.इधर,डेंगू के बढ़ते मामले ने राज्य सरकार की भी नींद उड़ा दी है.क्योंकि डेंगू ने सिर्फ सिलीगुड़ी ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में पांव पसार लिया है.इसको लेकर मुख्यमंत्री भी परेशान हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कल ही डेंगू को लेकर समीक्षा बैठक ही. उसके बाद प्रशासनिक हलकों तथा स्वास्थ्य विभाग में भी खलबली मची हुयी है. मंगलवार को सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में भी प्रशासन की तत्परता देखी गयी.

आरकेएस के चेयरमैन ने लिया हालात का जायजा

अस्पताल के रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के चेयरमैन रुद्रनाथ भट्टाचार्य ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल का दौरा किया. उन्होंने अस्पताल में भर्ती रोगियों के साथ बात की. रोगियों की संख्या का आलम यह था कि स्थिति को देखकर श्री भट्टाचार्य भी परेशान हो गए. अस्पताल में पैर रखने तक की जगह नहीं थी.आउटडोर के हालात तो और भी खराब थे.यहां रोगियों की लंबी लाइन लगी हुयी थी.इनमें से अधिकांश रोगी बुखार से पीड़ित थे.श्री भट्टाचार्य ने कई रोगियों से भी बात की. रोगियों का कहना था कि डेंगू का इलाज सरकारी अस्पताल में कराने के अलावा और कोई चारा नहीं है. क्योंकि निजी अस्पतालों में खर्च काफी अधिक है. रोगियों ने श्री भट्टाचार्य से बात करते हुए आगे कहा कि सरकारी अस्पताल में चाहे जमीन पर ही चिकित्सा क्यों ना हो,चिकित्सा होनी चाहिए. क्योंकि वहलोग 30 से 40 हजार रूपये खर्च कर निजी अस्पतालों में चिकित्सा नहीं करा सकते.

डॉक्टरों व अधिकारियों के साथ बैठक

चेयरमैन रुद्रनाथ भट्टाचार्य ने अस्पताल अधीक्षक अमिताभ मंडल के साथ बातचीत की. वह उनको साथ लेकर विभिन्न वार्डों के दौर पर भी गए. उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों और जिला स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ बैठक भी की. बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए श्री भट्टाचार्य ने माना कि बुखार पीड़तों की संख्या लगातार बढ़ रही है.स्वभाविक रूप से बेड कम पड़ रहे हैं. हांलाकि रोगियों की चिकित्सा में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है. रातों रात बेडों की संख्या बढ़ाना संभव नहीं है.इसलिए रोगियों की चिकित्सा जमीन पर भी की जा रही है.

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