पहाड़ पर पांच पावर स्टेशन बंद

Updated at :25 Jul 2017 8:34 AM
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पहाड़ पर पांच पावर स्टेशन बंद

सिलीगुड़ी. महीन भर से भी अधिक समय से दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में जारी गोरखालैंड आंदोलन की वजह पहाड़ पर पांच पावर स्टेशन फिलहाल सुरक्षा कारणों से बंद हैं. बंद पांच पावर स्टेशनों के बावजूद बिजली आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है. बंद पावर स्टेशनों के वजह से न बिजली कटौती की जा रही है […]

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सिलीगुड़ी. महीन भर से भी अधिक समय से दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में जारी गोरखालैंड आंदोलन की वजह पहाड़ पर पांच पावर स्टेशन फिलहाल सुरक्षा कारणों से बंद हैं. बंद पांच पावर स्टेशनों के बावजूद बिजली आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है. बंद पावर स्टेशनों के वजह से न बिजली कटौती की जा रही है और न ही लोडशेडिंग.

पहाड़ के साथ-साथ पूरे राज्य भर में बिजली आपूर्ति सामान्य है. यह कहना है ममता सरकार के विद्युत आपूर्ति मंत्री शोभन देव चटर्जी का. वह सोमवार को सिलीगुड़ी के उत्तरकन्या में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान उक्त बातें कही. इस दौरान श्री चटर्जी ने मीडिया के सामने दावा ठोंकते हुए कहा कि पहाड़ पर बंद पांच पावर स्टेशनों के बावजूद राज्य सरकार बांग्लादेश को 250 मेगावाट बिजली सामान्य तरीके से आपूर्ति कर रही है.

अगर केंद्र सरकार से हरी झंडी मिल जाए तो राज्य सरकार आज की परिस्थिति में भी बांग्लादेश को हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति करने की क्षमता रखती है. श्री चटर्जी का दावा है कि बंद पावर स्टेशनों के बाद भी पहाड़ पर तीन यूनिट चालू है. राज्य प्रत्येक महीने 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है. जबकि बांग्लादेश को 250 मेगावाट बिजली आपूर्ति करने के बाद भी मुश्किल से आठ हजार मेगावाट ही खपत हो पाती है. दो हजार मेगावाट बिजली प्रत्येक महीने बच रही है. इन्हीं कारणों से राज्य का आय बढ़ाने के लिए बांग्लादेश को 250 मेगावाट के बजाय हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति करने का प्रस्ताव केंद्र के पास राज्य सरकार ने भेजी है. मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए श्री चटर्ची ने कहा कि पहाड़ पर बंद पावर स्टेशनों से सरकार को कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है बल्कि उत्पादन में कुछ फिसदी की ही कमी आयी है.

जमीन अधिग्रहण की समस्या

एक सवाल के जवाब में श्री चटर्जी ने स्वीकार किया कि सोलर पावर सिस्टम को पूरे राज्य में विकसित करने में सरकार को जमीन अधिग्रहण करने में अड़चने आ रही है. जमीन समस्या के वजह से ही पूर्व मेदनीपुर का प्रोजेक्ट अटका पड़ा है. राज्य सरकार की 2022 तक पूरे राज्य में सोलर पावर प्लांट विकसित करने की योजना है. फिलहाल पहाड़ पर टीसीएफ सोलर प्लांट चालू है. इस यूनिट से 10 मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रत्येक महीने होता है.

नवान्न से उत्तर कन्या आया बिजली दफ्तर

पहाड़ समेत पूरे उत्तर बंगाल के लोगों को ‘ममता’ का एक और सौगात मिला है. उत्तर बंगाल में कल-कारखानों को विकसित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर ही नवान्न के विद्युत मंत्रालय से बिजली दफ्तर को उत्तरकन्या लाया गया है. यह कहना है विद्युत आपूर्ति मंत्री शोभन देव चटर्जी का. उन्होंने सोमवार को सिलीगुड़ी से सटे फूलबाड़ी-कामरांगागुड़ी स्थित मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में उत्तर बंगाल के लोगों की सुविधा हेतु नये बिजली दफ्तर का समारोह पूर्वक शुभारंभ किया.

इस शुभारंभ समारोह पर शोभन देव के साथ पर्यटन मंत्री गौतम देव व उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष के अलावा राज्य विद्युत मंत्रालय के मुख्य सचिव इंस्पेक्टर कल्याण कुमार धारा व उत्तरकन्या के बिजली दफ्तर के डिप्टी चीफ इंस्पेक्टर सौरभ सरकार भी मौजूद थे. इस शुभारंभ समारोह के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए शोभन देव ने कहा कि गोरखालैंड को लेकर पहाड़ पर 40 दिनों से जारी हिंसक आंदोलन के बावजूद मां-माटी-मानुष की तणमूल सरकार व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहाड़ समेत पूरे उत्तर बंगाल के चहुमुखी विकास के लिए काफी गंभीर है.

उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी में बिजली दफ्तर को सिफ्ट करने से केवल सिलीगुड़ी के लोगों को ही नहीं बल्कि पहाड़ समेत पूरे उत्तर बंगाल के लोगों को इसका फायदा मिलेगा. उन्होंने दावे के साथ कहा कि किसी भी तरह का लघु उद्योग हो या बड़े स्तर के कल-कारखानों को चालू करने के लिए अब यहां के उद्योगपतियों को लाइसेंसो के लिए बार-बार कोलकाता नहीं दौड़ना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कल-कारखानों को चालू करने के लिए इंडस्ट्रियल लाइसेंस, कॉमर्शियल लाइसेंस समेत विभिन्न तरह के कुल 12 लाइसेंसों व अन्य जरुरी दस्तावेजों का आवेदन बिजली दफ्तर को करना पड़ता है. उत्तरकन्या में बिजली दफ्तर के शुरु होने से उत्तर बंगाल के सरकारी इलेक्ट्रिक कांट्रेक्टरों में खुशी की लहर देखी जा रही है. आज बिजली दफ्तर के शुभारंभ समारोह के दौरान भारी तादाद में कांट्रेक्टर भी मौजूद थे.

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