बंगाल चुनाव में ‘ड्रेस कोड’! वायरल न्यूज पर भड़की टीएमसी, चुनाव आयोग ने दी सफाई, जानें क्या है पूरा विवाद

Published by :Mithilesh Jha
Published at :01 May 2026 6:05 PM (IST)
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West Bengal Election 2026 Dress Code Controversy

West Bengal Election 2026 Dress Code Controversy: पश्चिम बंगाल चुनाव खत्म होने के बाद बुजुर्ग मतदाताओं के ड्रेस कोड पर विवाद खड़ा हो गया है. टीएमसी ने इसे मतदाताओं की आजादी पर हमला बताया, तो चुनाव आयोग ने कहा कि कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया. पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट.

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West Bengal Election 2026 Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की वोटिंग का दौर समाप्त हो चुका है. लेकिन विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा विवाद बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के ड्रेस कोड (Dress Code) को लेकर शुरू हुआ है.

टीएमसी ने चुनाव आयोग पर बोला हमला

सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ खबरों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर बुजुर्ग मतदाताओं को विशेष तरह के कपड़े पहनकर आने या खास रंगों से परहेज करने का मौखिक निर्देश दिया गया. टीएमसी ने इसे मतदाताओं को डराने और उनकी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने की साजिश करार दिया.

क्या है विवाद की जड़?

विवाद की शुरुआत दक्षिण कोलकाता के कुछ मतदान केंद्रों से हुई, जहां कथित तौर पर पोलिंग अधिकारियों ने होम वोटिंग और बूथ पर आने वाले बुजुर्गों के पहनावे को लेकर कुछ टिप्पणियां की थी. टीएमसी का आरोप है कि भाजपा के इशारे पर कुछ अधिकारियों ने बुजुर्ग मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की. कुछ स्थानीय निवासियों ने कथित तौर पर शिकायत की कि उन्हें मतदान केंद्र के भीतर अपनी पसंद के पारंपरिक पहनावे (जैसे शॉल या गमछा) के लिए टोकने की कोशिश की गयी.

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चुनाव आयोग ने कहा- कोई ड्रेस कोड नहीं

मामले के तूल पकड़ते ही चुनाव आयोग (ECI) ने स्पष्टीकरण जारी किया. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मतदाताओं के लिए कोई ‘ड्रेस कोड’ तय नहीं किया गया. नियम केवल इतना है कि मतदाता ऐसा कोई कपड़ा या चिह्न पहनकर न आये, जिससे किसी विशेष राजनीतिक दल का प्रचार होता हो (जैसे पार्टी का लोगो या झंडा).

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भाजपा बनाम टीएमसी

भाजपा ने इन आरोपों को टीएमसी की ‘झुंझलाहट’ बताया. भाजपा नेताओं ने कहा कि जब हार सामने दिखती है, तो टीएमसी ऐसे बेबुनियाद मुद्दे उठाती है. टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मांग की कि मतदान के दिन किसी भी मतदाता को उनके पहनावे के आधार पर वोट देने से न रोका जाये.

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West Bengal Election 2026 Controversy: काउंटिंग से पहले ‘ड्रेस कोड’ विवाद का तड़का

4 मई को होने वाली मतगणना से पहले इस ‘ड्रेस कोड’ विवाद ने बंगाल के चुनावी माहौल में एक नया तड़का लगा दिया है. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. मतगणना भी कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न होगी.

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लेखक के बारे में

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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