ममता बनर्जी ने तोड़ दिया था रतन टाटा का सपना, 18 साल बाद शुभेंदु सरकार ने सिंगूर में बिछाया रेड कार्पेट
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 09 Jun 2026 6:48 AM
सिंगूर में बंद पड़ा टाटा का नैनो प्लांट.
Tata Return Singur 2026: पश्चिम बंगाल की नयी सरकार 18 साल बाद सिंगूर में टाटा समूह की वापसी की संभावनाओं पर काम कर रही है. नैनो प्रोजेक्ट के वर्ष 2008 में बंद होने के बाद अब संशोधित औद्योगिक नीति के जरिये टाटा को वापस लाने की तैयारी है.
खास बातें
Tata Return Singur 2026: पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर में वर्ष 2006 से 2008 के बीच चले हिंसक राजनीतिक आंदोलनों के कारण रतन टाटा का ‘नैनो ड्रीम प्रोजेक्ट’ (Nano Dream Project) हमेशा के लिए बंद हो गया था. वही सिंगूर 18 साल बाद देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने की मेजबानी के लिए सज रहा है.
टाटा की वापसी के लिए तैयार हो रहा रोडमैप
राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद, नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बंगाल की पुरानी ‘एंटी-इंडस्ट्री’ छवि को बदलकर ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली’ मेकओवर देने का मन बना लिया है. सरकार सिंगूर की उसी ऐतिहासिक जमीन पर टाटा समूह (Tata Group) की भव्य वापसी के लिए गुप्त और उच्चस्तरीय रोडमैप तैयार कर रही है.
सरकार का संदेश- निवेश के लिए सुरक्षित है बंगाल
यह केवल एक औद्योगिक प्रस्ताव नहीं है, देश के कॉरपोरेट जगत को यह संदेश देने की कोशिश है कि बंगाल अब बड़े विनिर्माण (Large-Scale Manufacturing) के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है. सिंगूर में लगभग 995 एकड़ की इस विवादित जमीन पर औद्योगिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार टाटा संस के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत की रूपरेखा तैयार कर रही है.
इसे भी पढ़ें : बंगाल की सत्ता बदलते ही टाटा समूह की सिंगूर वापसी की तैयारी, शमिक भट्टाचार्य बोले- प्रायश्चित नहीं, औद्योगिक पुनर्जागरण
Tata Return Singur 2026: सिर्फ कार नहीं, हर निवेश का स्वागत
सरकार की मंशा केवल टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल बिजनेस को वापस लाने तक सीमित नहीं है. नयी नीति के तहत टाटा समूह की किसी भी अन्य बड़ी फ्लैगशिप कंपनी (जैसे टाटा स्टील, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स या टाटा पावर) के मेगा प्रोजेक्ट्स को सिंगूर में स्थापित करने के लिए खुली छूट दी जायेगी.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
दूर होगा जमीन और कानूनी पेचीदगियों का चक्रव्यूह
- वर्ष 2016 में देश की सर्वोच्च अदालत ने वामपंथी सरकार द्वारा किये गये सिंगूर भूमि अधिग्रहण को अवैध घोषित करते हुए 9,117 भू-स्वामियों को जमीन वापस करने का आदेश दिया था.
- वर्ष 2023 में मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Arbitral Tribunal) ने टाटा मोटर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) को नुकसान के बदले 770 करोड़ रुपए ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया था. इस आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था.
- शुभेंदु अधिकारी की सरकार इन सभी कानूनी पेचों से पार पाने के लिए संशोधित भूमि नीति और नयी उद्योग-अनुकूल नीति (Revised Industrial Policy) तैयार कर रही है, ताकि टाटा समूह को बिना किसी कानूनी डर के सुरक्षित माहौल दिया जा सके.
इसे भी पढ़ें : सिंगूर की ‘नैनो’ कसक : टाटा के जाने के 18 साल बाद खंडहर में भविष्य ढूंढ़ रहे लोग, न खेती बची न उद्योग, पछता रहे आंदोलनकारी
रतन टाटा का वो दर्द और बंगाल की बर्बादी का दौर होगा खत्म
अक्टूबर 2008 में तत्कालीन विपक्ष के हिंसक प्रदर्शनों, सड़क जाम और फैक्टरी की दीवारों पर बमबाजी से तंग आकर रतन टाटा ने सिंगूर छोड़ने का फैसला किया था. रातोंरात इस प्रोजेक्ट को गुजरात के साणंद में शिफ्ट कर दिया गया. रतन टाटा ने तब भावुक होकर कहा था- आप उस जगह प्लांट नहीं चला सकते, जहां चारों तरफ से बम फेंके जा रहे हों. इस एक घटना ने बंगाल को अगले 2 दशकों के लिए औद्योगिक रूप से ‘बंजर’ बना दिया था.
इसे भी पढ़ें
सिंगूर में 500 करोड़ रुपये के निवेश को कैबिनेट की मंजूरी
बंगाल के सिंगूर में मोदी करेंगे कई प्रोजेक्ट की शुरुआत, तृणमूल ने लगाये विवादित पोस्टर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










