आरजी कर : दोषी की सजा को लेकर राज्य सरकार की याचिका हुई खारिज

Updated at : 08 Feb 2025 1:51 AM (IST)
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आरजी कर : दोषी की सजा को लेकर राज्य सरकार की याचिका हुई खारिज

हाइकोर्ट ने आरजी कर अस्पताल दुष्कर्म-हत्या मामले के दोषी संजय राय को निचली अदालत द्वारा सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील शुक्रवार को खारिज कर दी

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सीबीआइ और राज्य सरकार ने संजय राय को मौत की सजा सुनाने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में दायर की थी अपील

खंडपीठ ने कहा : चूंकि सीबीआइ ने जांच की थी, इसलिए सजा को चुनौती देने वाली उसकी अपील सुनवाई के लिए स्वीकार की जाती है

संवाददाता, कोलकाता

कलकत्ता हाइकोर्ट ने आरजी कर अस्पताल दुष्कर्म-हत्या मामले के दोषी संजय राय को निचली अदालत द्वारा सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील शुक्रवार को खारिज कर दी, जबकि सीबीआइ की ऐसी ही अपील स्वीकार कर ली. गौरतलब है कि सीबीआइ और राज्य सरकार, दोनों ने संजय राय को मौत की सजा सुनाने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी. क्या कहा खंडपीठ ने कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति देवांग्शु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद सब्बार रशीदी की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि सीबीआइ ने जांच की थी, इसलिए सजा को चुनौती देने वाली उसकी अपील सुनवाई के लिए स्वीकार की जाती है. राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी थी कि केंद्रीय एजेंसी के अलावा वह भी निचली अदालत द्वारा दी गयी सजा को अपर्याप्त मानते हुए अपील दायर कर सकती है. उल्लेखनीय है कि पिछले साल नौ अगस्त को यहां आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के सेमिनार कक्ष के अंदर एक चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी थी. घटना के अगले दिन कोलकाता पुलिस ने संजय राय को गिरफ्तार कर लिया था. वहीं, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बाद में मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी थी. केंद्रीय एजेंसी ने सात अक्तूबर को निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया और चार नवंबर को संजय राय के खिलाफ आरोप तय किये गये. निचली अदालत ने 20 जनवरी को संजय राय को मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. सीबीआइ और राज्य सरकार, दोनों ने संजय राय को दी गयी सजा को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में अलग-अलग अपील दायर कर मौत की सजा सुनाने का अनुरोध किया था. खंडपीठ ने 27 जनवरी को दोनों अपीलों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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