राज्य में राष्ट्रपति शासन और अघोषित आपातकाल जैसे हालात : ममता

ममता बनर्जी ने राज्य में 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से हटाये जाने पर गुरुवार को चिंता व्यक्त की.
संवाददाता, कोलकाता
मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ‘50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से हटाये जाने’ पर गुरुवार को चिंता व्यक्त की और इसे ‘उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप’ करार दिया. उन्होंने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन और अघोषित आपातकाल जैसे हालात पैदा हो गये हैं. चुनाव आयोग की तीखी आलोचना जारी रखते हुए सुश्री बनर्जी ने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाई ‘संस्थानों का व्यवस्थित राजनीतिकरण’ और ‘संविधान पर सीधा हमला’ है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल को निशाना बनाकर अभूतपूर्व और चिंताजनक कदम उठा रहा है. सुश्री बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिये कहा कि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही राज्य के 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को अचानक और मनमाने तरीके से हटा दिया गया, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आइजी, डीआइजी, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक शामिल हैं. उन्होंने इसे प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उच्च स्तर की राजनीतिक दखलअंदाजी बताया. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष रहने वाली संस्थाओं का राजनीतिकरण किया जा रहा है, जो संविधान पर सीधा हमला है. एक तरफ जहां कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एसआइआर प्रक्रिया चल रही है और अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, वहीं आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण नजर आता है. अब तक अनुपूरक मतदाता सूची जारी नहीं की गयी है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी है. इससे आम नागरिकों में चिंता और असमंजस का माहौल है. सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि आइबी, एसटीएफ और सीआइडी जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को चुनिंदा तरीके से हटाकर राज्य से बाहर भेजा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई में ‘विरोधाभास’ का आरोप लगाते हुए कहा कि हटाये गये अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह शासन नहीं है. यह अराजकता, भ्रम और घोर अक्षमता को दर्शाता है, जिसे अधिकार के रूप में पेश किया जा रहा है. उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर भाजपा इतनी बेचैन क्यों है और बंगाल को बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के फैसलों में विरोधाभास का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि एक तरफ आयोग कहता है कि हटाये गये अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जायेगा, वहीं दूसरी तरफ कुछ ही घंटों में उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर बाहर भेज दिया जाता है.
उन्होंने सिलीगुड़ी और बिधाननगर के पुलिस कमिश्नरों को बिना विकल्प दिये पर्यवेक्षक नियुक्त करने पर भी सवाल उठाये, जिससे ये दोनों अहम शहर कुछ समय के लिए बिना नेतृत्व के रह गये. हालांकि, बाद में इस गलती को सुधारा गया. ममता बनर्जी ने इसे अराजकता, भ्रम और अक्षमता करार दिया और कहा कि यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, जिसका मकसद संस्थाओं के जरिये बंगाल पर नियंत्रण करना है. मुख्यमंत्री ने राज्य के अधिकारियों और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता जतायी और कहा कि बंगाल कभी डर के आगे नहीं झुकेगा. उन्होंने साफ कहा कि बंगाल लड़ेगा, विरोध करेगा और हर साजिश को नाकाम करेगा.सीएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त को फिर लिखा पत्र
कोलकाता. राज्य विधानसभा चुनाव से पहले शीर्ष नौकरशाहों और आइपीएस अधिकारियों के रातोंरात तबादला किये जाने को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधने के कुछ घंटों बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीइसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आयोग के कामकाज पर ‘गहरा आश्चर्य’ व्यक्त किया. सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि आयोग ‘शिष्टाचार और संवैधानिक मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ गया है. उन्होंने लिखा: निर्वाचन आयोग के कामकाज से मैं स्तब्ध हूं, जो मेरे हिसाब से शालीनता और संवैधानिक औचित्य की सभी सीमाओं को पार कर गया है. आयोग ने स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और जमीनी हकीकत या जनता के कल्याण की जरा भी परवाह नहीं की है.मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय से संपर्क करने के कदम का भी जिक्र किया और कहा कि अदालत ने चिंताओं को स्वीकार किया है और निर्देश जारी किये हैं जिन्हें वर्तमान में लागू किया जा रहा है. हाल में सीइसी को लिखा गया सुश्री बनर्जी का यह दूसरा पत्र है. आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद आयोग ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कई जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों समेत कई वरिष्ठ राज्य अधिकारियों का ‘एकतरफा’ तबादला कर दिया था.
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