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पांच जिलों में स्थापित होंगे राइपनिंग सेंटर

Updated at : 20 Jan 2025 12:35 AM (IST)
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पांच जिलों में स्थापित होंगे राइपनिंग सेंटर

उन्होंने बताया हर साल तूफानों के कारण इन फलों की फसल को काफी नुकसान पहुंचता है.

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शिव कुमार राउत, कोलकाता

बंगाल आम के लिए भी प्रसिद्ध है. राज्य में कई किस्म के आम की खेती होती है, जो दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं. पर हर साल आंधी-तूफान और काल बैशाखी के कारण आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचता है. ऐसे में आम की बर्बादी को रोकने और अन्य फलों को भी सुरक्षित ढंग से पकाने के लिए राइपनिंग सेंटर यानी फल पकाने वाले केंद्र स्थापित किये जायेंगे. राज्य के खाद्य प्रसंस्करण और बागवानी विभाग (हॉर्टिकल्चर) के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के पांच जिलों में राइपनिंग सेंटर स्थापित किये जायेंगे.

बता दें कि भंडारण और परिवहन के अभाव के कारण बागान में फलों को एकत्र किये जाने के बाद करीब 25-30 फीसदी पके हुए फल नष्ट हो जाते हैं. यह जानकारी राज्य के हॉर्टिकल्चर मंत्री अरूप राय ने दी. उन्होंने बताया हर साल तूफानों के कारण इन फलों की फसल को काफी नुकसान पहुंचता है. पर मौसम की पूर्वानुमान प्रणाली से प्राकृतिक आपदा से फलों को नुकसान होने से बचाया जा सकता है. इसलिए अगर हमारे पास फल पकाने वाले केंद्र होंगे, तो फलों को प्राकृतिक आपदा से पहले ही तोड़ कर उन्हें उक्त केंद्र में संग्रहीत कर रखा जा सकता है. इससे किसानों को नुकसान नहीं होगा.

नदिया, मालदा और हावड़ा समेत पांच जिलों में होगा

काममंत्री अरूप राय ने बताया कि फलों को पकाने वाले केंद्र नदिया, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, मुर्शिदाबाद और मालदा में स्थापित होंगे. उन्होंने बताया कि इसके लिए विभाग को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाइ) के तहत 20 करोड़ रुपये मिले हैं और इस राशि का एक हिस्सा इन कक्षों की स्थापना के लिए उपयोग में किया जायेगा. राज्य सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स (आइटी एंड ई) विभाग तूफान या कीटों की वजह से फलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का इस्तेमाल करने पर काम कर रहा है. इसके लिए यह विभाग हॉर्टिकल्चर विभाग के साथ संपर्क में है. राज्य के आइटी विभाग के एक अधिकारी ने कहा : हमने मौसम के पूर्वानुमान के साथ-साथ मिट्टी नेचर के अनुसार कीटनाशक उपयोग के विभिन्न डेटाबेस का उपयोग करके एक प्रणाली विकसित करने के लिए मशीन लर्निंग और एआइ का इस्तेमाल करने पर आइआइटी खड़गपुर के संपर्क में हैं, ताकि प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए पहले से ही आम या अन्य फलों को तोड़ सकें और बर्बादी को रोक सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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