अवैध कॉल सेंटर पर छापा, 1.18 करोड़ बरामद, चार गिरफ्तार

Updated at : 27 Feb 2025 1:43 AM (IST)
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अवैध कॉल सेंटर पर छापा, 1.18 करोड़ बरामद, चार गिरफ्तार

कोलकाता पुलिस की खुफिया शाखा ने अवैध कॉल सेंटर की आड़ में भारतीयों के साथ ही विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है.

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गार्डेनरीच में कोलकाता पुलिस की खुफिया शाखा की बड़ी कार्रवाई

संवाददाता, कोलकाताकोलकाता पुलिस की खुफिया शाखा ने अवैध कॉल सेंटर की आड़ में भारतीयों के साथ ही विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. मंगलवार की रात गार्डेनरीच थाना अंतर्गत आयरन गेट रोड स्थित व्हाइट हाउस बिल्डिंग में छापेमारी कर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. आरोपियों के ठिकाने से करीब 1.18 करोड़ रुपये नकद व सोने के कुछ गहने तथा अन्य सामान जब्त किये गये हैं. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मुखबिरों से कोलकाता पुलिस की गुप्तचर शाखा को अवैध कॉल सेंटर का पता चला था. पुख्ता तथ्य मिलते ही गार्डेनरीच इलाका स्थित उक्त कॉल सेंटर में छापेमारी की गयी. वहां से गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया. उनके नाम मुर्शील खान (28), जस्टिन पॉल (28), मोहम्मद शाहरुख (33) और खालिद यूसुफ खान (29) हैं. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 61(2), 319(2), 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2) और आइटी एक्ट की 66, 66सी, 66डी, 43के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है. आरोपी कंप्यूटर में टेक्निकल सपोर्ट दिलाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करते थे. उन्होंने कुल कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है, यह फिलहाल जांच का विषय है. अवैध कॉल सेंटर में छापेमारी के दौरान भारी परिमाण में नकद राशि और गहने ही नहीं, बल्कि कुछ लैपटॉप, राउटर और अन्य दस्तावेज भी जब्त किये गये हैं. पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने की कोशिश में जुटी हुई है.

गिरोह के सदस्य डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर भी करते थे ठगी

गिरोह के सदस्यों पर आरोप है कि अवैध कॉल सेंटर की आड़ में वे अलग-अलग तरीकों से लोगों से ठगी करते थे. आरोप है कि लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने का भय दिखाकर भी उनसे रुपये ऐंठे जाते थे. इतना ही नहीं, आरोपियों ने अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को खुद को प्रतिष्ठित कंपनी से जुड़ा होने व उन्हें कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की तकनीकी मदद के नाम पर भी झांसा दिया. आरोपी तकनीकी सहायता के नाम पर पीड़ितों के कंप्यूटर व लैपटॉप पर रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे. फिर उनके कंप्यूटर के हैक होने की बात कहकर उन्हें तकनीकी मदद के नाम पर बैंक व अन्य निजी जानकारी का पता लगाकर उन्हें चूना लगाया जाता था.

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