प्रतीक के इस्तीफे से माकपा में छिड़ा वैचारिक बहस, उषासी चक्रवर्ती और मीनाक्षी मुखर्जी ने दिये बड़े बयान
Published by : Ashish Jha Updated At : 16 Feb 2026 7:23 PM
Prateek Ur Rahman: प्रतीक-उर के राज्य समिति से इस्तीफा देते ही बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गयी है. प्रतीक-उर रहमान अब चर्चा के केंद्र में हैं. एक ओर सीपीएम नेता मीनाक्षी मुखर्जी ने प्रतीक-उर के इस्तीफे पर अपनी बात रखी है तो दूसरी ओर अभिनेत्री, सीपीएम समर्थक और श्याममल चक्रवर्ती की बेटी उषासी चक्रवर्ती ने फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखी है.
मुख्य बातें
Prateek Ur Rahman: कोलकाता. प्रतीक-उर-रहमान के माकपा राज्य समिति से इस्तीफा देने के बाद अभिनेत्री, सीपीएम समर्थक और श्याममल चक्रवर्ती की बेटी उषासी चक्रवर्ती ने फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखी है. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर प्रतीक-उर रहमान का नाम नहीं लिया, लेकिन सीपीएम से उनके अलग होने के संदर्भ में उन्होंने माओ और नेपाल देव भट्टाचार्य का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने लिखा है- रवींद्रनाथ टैगोर के इस प्रसिद्ध कथन को मत भूलिएगा. हम जैसे कुछ मूर्खों के लिए, हार या जीत से भी ज़्यादा ज़रूरी है कि हम अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. हमें उम्मीद है कि जिन्हें हम अपना अनमोल मानते हैं, वे भी ऐसा ही करेंगे.
करीब से देखा है माकपा को
उषासी की राजनीतिक शिक्षा की शुरुआत उनके घर से ही हुई. श्याममल चक्रवर्ती की बेटी होने के नाते उन्होंने वामपंथी आंदोलन को करीब से देखा. हालांकि, उनकी पहचान सिर्फ एक नेता की बेटी होने तक ही सीमित नहीं है. जेएनयू की पूर्व छात्रा और समाजशास्त्र में पीएचडी धारक उषासी सैद्धांतिक दृष्टि से भी वामपंथ की प्रबल समर्थक हैं. उनका आज की तरीख में पार्टी के वैचारिक मसले पर आया यह लंबी पोस्ट बंगाल के राजनीतिक गलियारे खास कर वामपंथी खेमे में चर्चा का विषय बना हुआ है. वाम मोर्चा के अंदर एक खेमा सत्ता और विचार को लेकर बहसतलब है.
नेपाल दा की आयी याद
उषासी ने फेसबुक पर वैचारिक मुद्दे उठाते हुए लिखा है- बहुत समय पहले नेपाल दा (नेपाल देव भट्टाचार्य) को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था और उन्होंने कहा था- जब पिता अपने बेटे को छोड़ देता है, तो क्या बेटा अपने पिता को छोड़ देता है. मुझे अभी याद आया. मैंने सुना है कि माओत्से तुंग को भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से कई बार निष्कासित किया गया था. हर बार निष्कासन के समय उन्हें पार्टी के जुलूस के अंत में चलते देखा गया था. बाबा कर्णकुंती संगबाद ने मुझे सिखाया था – मैं विजय के प्रेम के लिए आया हूँ, विजय के प्रेम के लिए, राज्य के प्रेम के लिए. मैं वीर के मार्ग से विचलित नहीं होऊंगा.
प्रतीक का जाना संघर्ष के लिए नुकसान
दूसरी ओर, सीपीएम नेता मीनाक्षी मुखर्जी ने एक परिपक्व राजनीतिज्ञ की तरह प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी सीपीएम के शीर्ष नेतृत्व पर डाली है. उन्होंने इस पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की. मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा- मैंने इसे फेसबुक पर देखा. हमारे पार्टी नेता वहां हैं. वे पूरी कहानी बताएंगे. पार्टी में प्रतीक-उर की अहमियत की ओर हल्का इशारा करते हुए उन्होंने कहा- वह हमारी पार्टी के नेता हैं. राज्य भर में हमारे पार्टी के साथी संघर्ष कर रहे हैं. प्रतीक-उर ने भी संघर्ष किया है. सभी कार्यकर्ताओं ने जी-जान से लड़ाई लड़ी है. अगर पार्टी में एक भी कार्यकर्ता पार्टी का काम नहीं करता है, तो यह हमारा नुकसान है. हमारा नुकसान मेहनतकश लोगों का नुकसान है. हम उस नुकसान के खिलाफ लड़ रहे हैं.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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