बंगाल में माकपा को तगड़ा झटका, प्रतीक उर रहमान ने छोड़ी पार्टी

Updated at : 16 Feb 2026 6:47 PM (IST)
विज्ञापन
बंगाल में माकपा को तगड़ा झटका, प्रतीक उर रहमान ने छोड़ी पार्टी

Pratik Ur Rahman : सीपीएम नेता प्रतीक उर रहमान ने पार्टी छोड़ दी है. माकपा का हुमांयू कबीर के साथ गठबंधन के लिए बात करना प्रीतक की नाराजगी का कारण बताया जा रहा है. प्रतीक ने साफ शब्दों में कहा है कि वो अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं कर सकते हैं. हालांकि पार्टी की ओर से उनके इस्तीफे पर अभी कुछ भी नहीं कहा गया है.

विज्ञापन

Pratik Ur Rahman : कोलकाता: सीपीएम को बंगाल में तगड़ा झटका लगा है. युवा माकपा नेता प्रतीक उर रहमान ने राज्य समिति से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है. एसएफआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी को अपना त्यागपत्र भेज दिया है. प्रतीक ने पार्टी को लिखित में सूचित किया है कि उन्होंने राज्य और जिला नेतृत्व के हालिया फैसले के परिणामस्वरूप सीपीएम से इस्तीफा दे दिया है. प्रतीक के राज्य समिति से इस्तीफा देने के बाद से ही उन पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गयी है. तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने तंज कसते हुए पूछा है कि चुनाव के ठीक पहले यह फैसला क्यों. तृणमूल के इस सवाल पर प्रतीक ने कहा कि उनका किसी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है.

सलीम की कबीर से मुलाकात से कई नेता नाराज

तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित भरतपुर के विधायक हुमायूं कबीर ने पिछले दिनों तृणमूल को छोड़कर अन्य सभी पार्टियों से गठबंधन का आह्वान किया. उन्होंने सीपीएम से भी अनुरोध किया. इसके बाद माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने न्यूटाउन में हुमायूं से मुलाकात की. यहीं से सलीम का पार्टी के एक वर्ग से विवाद शुरू हुआ. हालांकि, उस समय युवा नेता शतरूप घोष उनके बगल में खड़े थे. उन्होंने कुछ टिप्पणियां कीं. शतरूप घोष ने कहा-सीपीएम ने अभी तक यह नहीं कहा है कि वह हुमायूं पर भरोसा करेगी या नहीं, लेकिन क्या हम सभी नैतिक और सैद्धांतिक बाधाओं के साथ अकेले बैठे हैं. अगर भाजपा उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो कोई गलती नहीं है. अगर तृणमूल उन्हें मंत्री बनाती है, तो कोई गलती नहीं है. अगर सीपीएम उनसे बात करती है तो यह अपराध है.

प्रतीक का पार्टी को लिखा पत्र

शतरूप घोष के बयान के तुरंत बाद, प्रतीक-उर-रहमान ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा- नैतिकता और सदाचार के बिना, चाहे कुछ भी हो जाए, कम्युनिस्ट पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं है. हालांकि, उन्होंने वहां शतरूप घोष का नाम लेकर कुछ नहीं लिखा. फिर भी, माकपा के भीतर यह फुसफुसाहट चल रही थी कि उन्होंने यह टिप्पणी शतरूप घोष के बयान पर की है. इसके बाद देखा गया कि प्रतीक ने रविवार को पार्टी को एक पत्र भेजा. इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा, ‘हाल ही में, मैं पार्टी के जिला और राज्य नेतृत्व के कुछ विचारों और कार्यप्रणालियों के अनुरूप खुद को ढाल नहीं पा रहा हूं. मुझे मानसिक संघर्ष में दिन गुजारने पड़ रहे हैं. इसीलिए मैं सभी पदों से मुक्ति मांग रहा हूं.

शतरूप घोष ने दी ये प्रतिक्रिया

सीपीएम नेता शतरूप घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया- मैं कोलकाता से बाहर हूं. मुझे नहीं पता कि यह सच है या झूठ. प्रतीक हमारी पार्टी के बहुत महत्वपूर्ण नेता हैं. उन्होंने बहुत जिम्मेदारी से संघर्ष किया है. मुझे उम्मीद है कि सब कुछ सुलझ जाएगा, लेकिन इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है. दूसरी ओर, प्रतीक ने कहा- व्यक्तिगत रूप से मेरा किसी से कोई मतभेद नहीं है. मैंने पार्टी को अपने विचार बता दिए हैं. शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक मुझसे संपर्क नहीं किया है. यह पार्टी का आंतरिक मामला है, इसलिए मैं इसे सबके सामने नहीं कहूंगा. समय आने पर मैं मीडिया को बताऊंगा.

Also Read: वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों को मिलने लगा मांसाहार, सामने आयी मेनू की पूरी लिस्ट

विज्ञापन
Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola