GST का पैसा भी चाहिए और कर वसूली पर केंद्र को दोष भी देना है, निर्मला सीतारमण ने कसा ममता बनर्जी पर तंज

Nirmala Sitharaman : संसद में बयान देते हुए उन्होंने सौगत रॉय का नाम लेकर भी उनका मजाक उड़ाया. संसद में खड़े होकर उन्होंने साफ कहा- प्रोफेसर सौगत रॉय कहते हैं कि बजट में पश्चिम बंगाल का नाम नहीं लिया गया है. वे जानबूझकर गलत जानकारी दे रहे हैं. हमने किसी राज्य का नाम नहीं लिया है.
मुख्य बातें
Nirmala Sitharaman : कोलकाता/ नई दिल्ली: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बंगाल सरकार एक ओर जीएसटी का पैसा चाहती है और दूसरी ओर जीएटी की वूसली की आलोचना करती है. केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की ममता सरकार सड़क शुल्क लगाती है और नए वाहन पंजीकरण के समय कर वसूलती है. यदि जीएसटी से नागरिकों पर पड़ने वाले बोझ को लेकर इतनी चिंता है, तो फिर राज्य स्तर पर अतिरिक्त कर क्यों लगाए जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए इन्हें माफ किया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय जीएसटी संग्रह की आलोचना की जा रही है, जबकि राज्य कर वसूले जा रहे हैं.
जीएसटी को लेकर दिया गया बयान झूठा
निर्मला सीतारमण ने कहा- मैंने माननीय सांसद अभिषेक बनर्जी का भाषण बहुत ध्यान से सुना. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने उन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, जो इस सदन में सभी को ज्ञात हैं. उन्होंने बड़ी चालाकी से व्यक्ति के जीवन चक्र के बारे में बात की और झूठ बोला. केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से दूध पर कोई जीएसटी नहीं है. क्या वे सदन के सदस्यों को मूर्ख समझ रहे हैं. शिक्षा पर कोई जीएसटी नहीं है. असल में, जीएसटी से छूट है. प्री-स्कूल से लेकर उच्च माध्यमिक शिक्षा तक, कोई जीएसटी नहीं है. मान्यता प्राप्त योग्यताओं की शिक्षा पर कोई जीएसटी नहीं है. किताबों, पाठ्यपुस्तकों और नोटबुक पर 2017 से जीएसटी नहीं है. उन्होंने पेंसिल, शार्पनर आदि के बारे में भी बात की. कोई इतना झूठ कैसे बोल सकता है. पेंसिल, शार्पनर, इरेज़र, अभ्यास पुस्तिकाएं, नोटबुक और नक्शों पर शून्य जीएसटी है.
बंगाल में शायद मौत के बदले रिश्वत की वूसली
निर्मला ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में, मैं जीएसटी परिषद के सदस्यों को धन्यवाद देना चाहती हूं, क्योंकि 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी 0% है. व्यक्तिगत योजनाओं पर स्वास्थ्य और जीवन बीमा को अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों (सितंबर 2025) में 0% कर दिया गया है. उन्होंने इस तथ्य का भी जिक्र किया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उस पर जीएसटी लगाया जाता है, जबकि अंत्येष्टि सेवाओं पर कभी जीएसटी लगता ही नहीं था. हो सकता है कि यह पश्चिम बंगाल में सक्रिय कोई गिरोह हो, जो मौत के बदले रिश्वत वसूलता हो.
किसी राज्य का नाम नहीं लिया
केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बंगाल के लिए घोषित मदों की सूची पेश की. संसद में बयान देते हुए उन्होंने सौगत रॉय का नाम लेकर भी उनका मजाक उड़ाया. संसद में खड़े होकर उन्होंने साफ कहा- प्रोफेसर सौगत रॉय कहते हैं कि बजट में पश्चिम बंगाल का नाम नहीं लिया गया है. वे जानबूझकर गलत जानकारी दे रहे हैं. हमने किसी राज्य का नाम नहीं लिया है. बंगाल को पांच साल में पांच हजार करोड़ रुपये मिलने की संभावना है. यह पैसा मिलने से बंगाल को कौन रोक रहा है. उन्होंने राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के बारे में भी बात की. निर्मला ने कहा- यह केवल अहमदाबाद में है. हमने कहा है कि पूर्वी क्षेत्र में एक और नया संस्थान बनेगा. यह पश्चिम बंगाल में भी हो सकता है.
बंगाल को बहुत कुछ मिला है
केंद्रीय वित्तमंत्री ने बंगाल के लिए आवंटित निधि और बंगाल की प्राप्तियों के बारे में बात करते हुए कहा- पश्चिम बंगाल पूर्वी भारत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति वाला राज्य है. दुर्गापुर-आसनसोल के आधार पर पूर्वी तट औद्योगिक गलियारा बनाया जाएगा. उत्तरी बंगाल में हाई-स्पीड ट्रेनों की व्यवस्था की गई है. वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड ट्रेन चलेगी. सिलीगुड़ी को एक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने एक बार फिर जूट उद्योग के बारे में बात की। उन्होंने कहा- हमने जूट उद्योग के लिए इतनी बड़ी घोषणा की है. घोषित की गई नई परियोजना के माध्यम से हुगली क्षेत्र में जूट मिलों से जुड़े जूट किसानों के जीवन और आर्थिक स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है.
महुआ ने फिर किया हमला
निर्मला सीतारमण के इस बयान पर तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाकर अपना पक्ष रखा गया है, लेकिन मैं यह नहीं समझा पाईं कि आपके बजट में बंगाल को एक रुपया भी क्यों नहीं दिया गया. आपने यह क्यों नहीं माना कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सभी सर्वेक्षणों से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की कोई जीत नहीं होने जा रही है.
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लेखक के बारे में
By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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