गोल्डन ऑवर में उपचार से बचायी जा सकती है जान
Published by : GANESH MAHTO Updated At : 02 Nov 2025 2:20 AM
उन्होंने बताया कि हर 10 में से एक मौत स्ट्रोक के कारण होती है और यह विकलांगता का भी एक प्रमुख कारण है.
कोलकाता. विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर डिसन अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य स्ट्रोक के लक्षणों और समय पर उपचार के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना था. चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में हर चार में से एक व्यक्ति स्ट्रोक से प्रभावित है, और भारत में इसकी दर अन्य देशों की तुलना में अधिक है. डिसन अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ सुजय रंजन देव ने कहा कि थोड़ी-सी जागरूकता और समय पर कदम उठाकर स्ट्रोक से जुड़ी जटिलताओं को रोका जा सकता है. उन्होंने बताया कि हर 10 में से एक मौत स्ट्रोक के कारण होती है और यह विकलांगता का भी एक प्रमुख कारण है. वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ मधुपर्णा पाल ने कहा कि स्ट्रोक के लक्षण दिखायी देते ही रोगी को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए. उन्होंने समझाया कि यदि स्ट्रोक के रोगी को एक घंटे के भीतर थक्का-रोधी दवाओं का उपचार मिल जाये, तो रोगी सामान्य हो सकता है. इस एक घंटे के समय को गोल्डन ऑवर कहा जाता है, क्योंकि इसी दौरान उपचार के सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं. समय बीतने पर मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे रोगी को लकवा और अन्य गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. डॉ कैमेलिया पूरे ने कहा कि अचानक बेहोशी, शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन, बोलने या देखने में कठिनाई, या निगलने में परेशानी- ये सभी स्ट्रोक के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं. ऐसे में तुरंत डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है, स्वयं उपचार करने की कोशिश खतरनाक हो सकती है. डॉ मधुपर्णा ने बताया कि स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं- इस्केमिक (जब रक्त प्रवाह रुक जाता है) और रक्तस्रावी (जब कमजोर रक्त वाहिका फट जाती है)1 इसके अलावा क्षणिक इस्केमिक अटैक (टीआइए) भी होता है, जिसमें कुछ समय के लिए मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुकता है. भले ही यह अस्थायी लगे, लेकिन टीआइए के बाद गंभीर स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. चिकित्सकों ने लोगों से अपील की कि वे स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते उपचार करायें- क्योंकि सतर्कता ही सुरक्षा है.
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