छात्रा से यौन उत्पीड़न का मामला निकला फर्जी, कलकत्ता हाइकोर्ट का निर्देश- शिक्षक को दें 10 लाख मुआवजा
Published by : Ashish Jha Updated At : 27 May 2026 12:14 PM
कलकत्ता हाईकोर्ट
Calcutta High Court : पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा- यद्यपि बच्चे ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय संपत्ति’ हैं, फिर भी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के कड़े प्रावधानों का इस्तेमाल व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए नहीं किया जा सकता.
मुख्य बातें
Calcutta High Court : कोलकाता. यौन उत्पीड़न और अन्य आपराधिक मामलों में वित्तीय लाभ की लालसा से प्रेरित झूठी शिकायतों की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने फर्जी दावों को हतोत्साहित करने के लिए पीड़ित को चरणबद्ध तरीके से मुआवजा देने का प्रस्ताव दिया है. उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एक लड़की से बलात्कार करने के आरोप से एक प्राध्यापक को बरी करते हुए इन बदलावों का प्रस्ताव दिया और उन्हें 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. उच्च न्यायालय ने कहा कि अधीनस्थ अदालत में उनकी दोष सिद्धि और कारावास ने उनकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है.
झूठी शिकायतें एक चिंताजनक प्रवृत्ति
मुआवजे के दुरुपयोग को रोकने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के लिए नीतिगत सिफारिश करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि यद्यपि पीड़ित मुआवजा योजना पुनर्वास का एक सराहनीय साधन है, लेकिन न्यायालय एक चिंताजनक प्रवृत्ति देख रहा है जहां वित्तीय लाभ की लालसा अनैतिक व्यक्तियों को झूठी शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रेरित करती है. न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति अपूर्बा सिन्हा रे की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा- पीड़ितों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए, अधिक कठोर वितरण संरचना की आवश्यकता है.
पीड़ित को अंतरिम भुगतान का आदेश
अदालत ने एक ऐसा ढांचा प्रस्तावित किया जिसके तहत पीड़ित को अंतरिम भुगतान किया जायेगा, जो प्रारंभिक वितरण के रूप में मुआवजे की राशि का 25 प्रतिशत होगा. अदालत ने कहा कि शेष 75 प्रतिशत राशि अधीनस्थ अदालत में दोष सिद्ध होने पर पीड़ित (या उसके निकटतम संबंधी) के नाम पर ब्याज कमाने वाले खाते में जमा की जायेगी और ये धनराशि अपील के अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रहेगी. खंडपीठ ने कहा-चरणबद्ध भुगतान लागू करने से फर्जी मामले दर्ज करने की प्रवृत्ति को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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कानून न बने व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने का माध्यम
अदालत ने राज्य सरकार के न्यायिक विभाग के प्रधान सचिव से इस मामले पर संबंधित विभागों को सलाह देने का अनुरोध किया और पश्चिम बंगाल राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव को इन सिफारिशों की समीक्षा करने और उन्हें लागू करने का निर्देश दिया. पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा- यद्यपि बच्चे ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय संपत्ति’ हैं, फिर भी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के कड़े प्रावधानों का इस्तेमाल व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए नहीं किया जा सकता.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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