मतुआ शरणार्थी के लिए राहत की खबर, दस्तावेज के बिना भी भर सकेंगे सीएए फार्म
शान्तनु ठाकुर
Matua Refugees: केंद्रीय जहाजरानी राज्यमंत्री व मतुआ समुदाय के नेता शांतनु ठाकुर ने आश्वस्त किया कि आने वाले समय में इस समस्या का समाधान किया जायेगा.
मुख्य बातें
Matua Refugees: कोलकाता. केंद्रीय जहाजरानी राज्यमंत्री व मतुआ समुदाय के नेता शांतनु ठाकुर ने अपने समुदाय के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि बांग्लादेशी दस्तावेज नहीं होने पर भी भविष्य में वे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. उनके इस बयान से शरणार्थी मतुआ समुदाय में राहत व खुशी देखी जा रही है. राज्य में मतुआ समुदाय की करीब डेढ़ करोड़ आबादी है, जो बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के चलते दशकों पहले यहां आकर बस गये थे.
तेज हो रही है नागरिकता देने की प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया अब तेजी से चल रही है. उन्होंने स्वीकार किया कि फिलहाल सीएए के तहत आवेदन के लिए बांग्लादेश से संबंधित दस्तावेजों की जरूरत पड़ रही है, जिसके कारण कई शरणार्थी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. कई लोगों के पास ये दस्तावेज नहीं हैं, इसलिए समस्या हो रही है. उन्होंने आश्वस्त किया कि आने वाले समय में इस समस्या का समाधान किया जायेगा.
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एक भी मतुआ को नहीं भेजा जायेगा बांग्लादेश
केंद्रीय मंत्री ने कहा- हम प्रयास कर रहे हैं कि विभिन्न संगठनों के प्रमाणन के आधार पर भी ऐसे लोगों (गैर मुस्लिम शरणार्थियों) को नागरिकता दी जा सके, जो दशकों पहले धार्मिक उत्पीड़न के चलते पड़ोसी देश से आकर यहां रह रहे हैं. शांतनु ठाकुर ने यह भी आश्वासन दिया कि अगर मतुआ समुदाय के किसी व्यक्ति का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया में मतदाता सूची से कट भी गया है, तब भी उन्हें बांग्लादेश नहीं भेजा जायेगा. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सीएए के तहत आवेदन कर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकेंगे.
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