चुनाव आयोग का सोशल मीडिया पर डिजिटल स्ट्राइक! फेक AI कंटेंट पर एक्शन, 11 हजार से ज्यादा पोस्ट हटाये

Published by :Mithilesh Jha
Published at :19 Apr 2026 3:42 PM (IST)
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ECI Action Unlawful Social Media Content West Bengal Election 2026

इलेक्शन कमीशन का प्रेस नोट.

ECI Action Unlawful Social Media Content: निर्वाचन आयोग (ECI) ने विधानसभा चुनावों के बीच सोशल मीडिया पर बड़ी कार्रवाई की है. फेक AI कंटेंट और भ्रामक पोस्ट पर 3 घंटे के भीतर एक्शन का आदेश दिया है. C-Vigil ऐप पर अब तक 3 लाख से ज्यादा शिकायतें मिलीं हैं.

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ECI Action Unlawful Social Media Content: विधानसभा चुनाव 2026 के बीच निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को लेकर बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. आयोग ने रविवार को एक अहम निर्देश जारी करते हुए कहा है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी भ्रामक AI-जेनरेटेड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) या छेड़छाड़ वाले कंटेंट पर सूचना मिलने के महज 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी.

फेक नैरेटिव और डीपफेक का इस्तेमाल पड़ेगा भारी

चुनाव आयोग ने डिजिटल घेराबंदी करते हुए साफ कर दिया है कि 2026 के चुनावों में ‘फेक नैरेटिव’ और ‘डीपफेक’ तकनीक के जरिये मतदाताओं को गुमराह करना अब आसान नहीं होगा. आयोग की इस सक्रियता का असर भी दिखने लगा है. 15 मार्च 2026 से अब तक 11 हजार से अधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और यूआरएल (URLs) पर कार्रवाई की जा चुकी है.

AI कंटेंट के लिए डिस्क्लोजर अनिवार्य

चुनाव आयोग ने पारदर्शिता बनाये रखने के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए नये नियम लागू किये हैं. आयोग ने कहा है कि चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाले किसी भी AI-अल्टरर्ड या सिंथेटिक कंटेंट पर अब ‘AI-Generated’ या ‘Digitally Enhanced’ का लेबल लगाना अनिवार्य होगा. ऐसे कंटेंट को किसने बनाया या जारी किया है, उस संस्था का नाम भी सार्वजनिक करना होगा, ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे.

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ECI Action Unlawful Social Media Content: 11000 पोस्ट पर दर्ज हुई FIR

असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी प्रक्रिया के दौरान आईटी नोडल अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं. कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली पोस्ट, आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) का उल्लंघन करने वाली सामग्री और चुनाव मशीनरी के खिलाफ झूठी कहानियों को चिह्नित किया गया है.

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चिह्नित किये गये 11,000 से अधिक मामलों में न केवल कंटेंट हटाया गया है, बल्कि कई मामलों में एफआईआर (FIR) भी दर्ज की गयी है. गलत सूचनाओं का खंडन (Rebuttal) जारी करवाया गया है.

C-Vigil ऐप पर शिकायतों की बाढ़

इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, मतदाताओं की सतर्कता ने भी चुनाव आयोग के काम को आसान बना दिया है. 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच C-Vigil ऐप के जरिये कुल 3,23,099 शिकायतें दर्ज हुईं. आयोग ने इनमें से 3,10,393 शिकायतों (यानी 96.01 प्रतिशत) का समाधान निर्धारित 100 मिनट की समय सीमा के भीतर ही कर दिया है.

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48 घंटे का साइलेंस पीरियड और पाबंदी

निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का हवाला देते हुए याद दिलाया है कि मतदान खत्म होने से 48 घंटे पहले ‘साइलेंस पीरियड’ (Silence Period) शुरू हो जाता है. इस दौरान टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया (Social Media) पर किसी भी तरह की चुनावी सामग्री प्रदर्शित करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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