भवानीपुर बना ‘मनोवैज्ञानिक युद्धक्षेत्र’, ममता के गढ़ में शुभेंदु की एंट्री से दिलचस्प हुआ मुकाबला, क्या ‘मिनी इंडिया’ तोड़ेगा दीदी की अजेय छवि?

Published by :Mithilesh Jha
Published at :28 Apr 2026 6:58 AM (IST)
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Bhabanipur Assembly Seat 2026: भवानीपुर विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर है. भाजपा ने यहां बूथ स्तर पर किलेबंदी की है, जबकि टीएमसी ‘घर की बेटी’ के नारे के साथ मैदान में है.

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Bhabanipur Assembly Seat 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सबसे बड़ी और हाई-प्रोफाइल लड़ाई अब भवानीपुर की गलियों में सिमट आयी है. दक्षिण कोलकाता की यह साधारण-सी दिखने वाली सीट ‘प्रतिष्ठा की लड़ाई’ बन चुकी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो यहां से तीन बार की विधायक हैं, उनका सीधा मुकाबला नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से है.

नंदीग्राम के बाद दीदी के गढ़ में शुभेंदु की चुनौती

भाजपा ने इस सीट को एक मनोवैज्ञानिक युद्धक्षेत्र की तरह पेश किया है. नंदीग्राम की ऐतिहासिक हार के बाद, अब दीदी के अपने गढ़ में शुभेंदु अधिकारी की चुनौती ने पश्चिम बंगाल के सियासी तापमान बढ़ा दिया है.

क्यों अहम है भवानीपुर विधानसभा?

कोलकाता नगर निगम के 8 वार्डों में फैला भवानीपुर विधानसभा अपनी सामाजिक विविधता के लिए जाना जाता है. इसे ‘मिनी इंडिया’ कहना गलत नहीं होगा. यहां बंगाली हिंदुओं के साथ-साथ गुजराती व्यापारी, पंजाबी, सिख, मारवाड़ी, जैन और बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता रहते हैं. बिहार, ओडिशा और झारखंड के प्रवासियों की भी यहां अच्छी तादाद है.

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जातीय समीकरण और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब 26.2 प्रतिशत कायस्थ, 24.5 प्रतिशत मुस्लिम, 14.9 प्रतिशत प्रवासी, 10.4 प्रतिशत मारवाड़ी और 7.6 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता हैं. भाजपा इसी सामाजिक समीकरण के सहारे बंगाली और गैर-बंगाली हिंदू वोटों को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है.

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TMC का दांव : ‘घर की बेटी’ बनाम विकास की राजनीति

तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस मुकाबले को आक्रामकता की बजाय भावनात्मक मोड़ दे रही है. पार्टी ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री की बजाय ‘पड़ोस की दीदी’ और ‘घर की बेटी’ के रूप में पेश कर रही है. लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री और महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को टीएमसी अपनी जीत का मुख्य आधार मान रही है. कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम का कहना है कि भवानीपुर के लोग ममता बनर्जी को कभी नहीं छोड़ेंगे.

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भाजपा की बूथ-दर-बूथ घेराबंदी

शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा ने महीनों पहले से भवानीपुर की किलेबंदी शुरू कर दी थी. भाजपा का मानना है कि यदि भवानीपुर में ममता बनर्जी को मात दी जाती है, तो उनकी ‘अजेय’ छवि पूरी तरह टूट जायेगी. भाजपा नेता देबजीत सरकार के मुताबिक, जनता अब तुष्टीकरण से ऊब चुकी है और राज्य में ‘राम राज्य’ चाहती है.

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Bhabanipur Assembly Seat 2026: 29 अप्रैल को जनता करेगी फैसला

2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी अब 5 साल बाद दीदी के घर में सेंध लगाने पहुंचे हैं. तृणमूल के लिए यह अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने की लड़ाई है, तो भाजपा के लिए बंगाल की सबसे शक्तिशाली नेता के दुर्ग को ढाहने का मौका. भवानीपुर का यह रोमांचक मुकाबला 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में सबसे चर्चित केंद्र है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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