वोटिंग से पहले बंगाल सरकार को हाईकोर्ट ने क्यों लगायी फटकार, अधिकारी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया, जानें पूरा मामला

Published by :Mithilesh Jha
Published at :28 Apr 2026 4:42 PM (IST)
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Calcutta High Court Slams Bengal Govt India Bangladesh Border Fencing Land to BSF

Calcutta High Court Slams Bengal Govt: कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन न सौंपने पर बंगाल सरकार को फटकारा है. कोर्ट ने अधिकारी पर जुर्माना लगाते हुए 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बताया है.

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Calcutta High Court Slams Bengal Govt: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार को जमकर फटकार लगायी है. हाईकोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ (BSF) को जमीन सौंपने के आदेश का पालन न करने पर अदालत ने सरकार के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया.

127 किलोमीटर में सिर्फ 8 किमी जमीन बीएसएफ को दी

कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर हैरानी जताते हुए कहा कि 127 किलोमीटर में से अब तक केवल 8 किलोमीटर जमीन ही बीएसएफ को दी गयी है. अदालत ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है.

चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है मामला : हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 जनवरी को आदेश दिया था कि राज्य सरकार 31 मार्च तक अधिग्रहीत की गयी 127 किलोमीटर जमीन बीएसएफ को सौंप दे. इसके लिए केंद्र सरकार से मुआवजा भी राज्य को मिल चुका है. 22 अप्रैल को मामले की सुनवाई हुई, तो पता चला कि सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया.

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हाईकोर्ट ने अधिकारी पर लगाया जुर्माना

अदालत के आदेश की अवहेलना करने और ‘टालमटोल’ वाली रिपोर्ट दाखिल करने के लिए संबंधित अधिकारी पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है. यह राशि अधिकारी को अपनी निजी जेब से भरनी होगी. खंडपीठ ने कहा कि ऐसी संक्षिप्त और अधूरी रिपोर्ट दाखिल करने की प्रथा बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

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राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल : केवल 8 KM जमीन ही क्यों मिली?

लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा (सेवानिवृत्त) द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां कीं. अदालत ने कहा कि सरकार ने यह नहीं बताया कि जनवरी के आदेश के बाद जिलेवार क्या कदम उठाये गये. कोर्ट ने पूछा कि यदि पूरी जमीन नहीं सौंपी जा सकी, तो इसके पीछे के ठोस कारण रिपोर्ट में क्यों नहीं लिखे गये.

2 सप्ताह में राज्य सरकार से कोर्ट ने मांगा हलफनामा

अब राज्य सरकार को 2 सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा. इसमें तिथि और स्थानवार जानकारी देनी होगी कि बीएसएफ को जमीन देने के लिए क्या दैनिक कार्यवाही की गयी.

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Calcutta High Court Slams Bengal Govt: 9 जिलों से जुड़ा है मामला

भारत-बांग्लादेश सीमा पश्चिम बंगाल के 9 महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरती है. बाड़ न होने के कारण घुसपैठ और तस्करी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. केंद्र सरकार पहले ही इस जमीन के लिए भुगतान कर चुकी है. फिर भी राज्य स्तर पर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अटकी हुई है. अब इस संवेदनशील मामले की सुनवाई 13 मई को होगी. तब तक सरकार को हर जिले की प्रगति रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी होगी.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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