सच्चाई तो यह है कि सारधा सहित अन्य चिटफंड कंपनियों के माध्यम से कमाये गये रुपये को तृणमूल कांग्रेस बचाना चाहती है, लेकिन मुख्यमंत्री कुछ भी कर लें, वह काला धन को बचा नहीं पायेंगी.
उन्हें डर है कि अगर सीबीआइ कार्यालय गये और फिर वहां से लौट नहीं पाये तो क्या होगा. गौरतलब है कि रोजवैली चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआइ ने कई बार तृणमूल कांग्रेस सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को नोटिस दे चुकी है, लेकिन सीबीआइ द्वारा नोटिस मिलने पर सुदीप बंद्योपाध्याय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और ना ही वह सीबीआइ कार्यालय ही पूछताछ के लिए जा रहे हैं. गौरतलब है कि सोमवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद मिथुन चक्रवर्ती ने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है. इस संबंध में श्री घोष ने कहा कि वह समझ चुके हैं कि इस पार्टी में रहने पर उनकी बदनामी ही होगी. इसलिए तो उन्होंने चिटफंड कंपनियों से लिये गये रुपये को भी वापस कर दिया है. वह इस प्रकार की पार्टी से जुड़ कर नहीं रहना चाहते, जिसकी वजह से उनका नाम खराब हो. इसलिए उन्होंने सांसद पद छोड़ना ही बेहतर समझा.

