कोलकाता : भारतीय रेल की माल ढुलाई में सबसे अधिक कोयले का योगदान है लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसमें खासी गिरावट की वजह से रेलवे ने विकल्प के रूप में लौह अयस्क की ढुलाई पर जोर दिया है. वर्ष 2015-16 के वित्तीय वर्ष में साउथ इस्टर्न रेलवे ने 73.83 मिलियन टन लौह अयस्क की ढुलाई की जो साउथ इर्स्टन रेलवे की कुल 134.29 मिलियन टन का 55 फीसदी है. वित्तीय वर्ष 2014-15 में साउथ इस्टर्न रेलवे ने 62.92 मिलियन टन की ढुलाई की थी. इस वर्ष उसमें 17.39 फीसदी बढ़त दर्ज की गयी है.
इसी तर्ज पर अप्रैल 2016 में भी साउथ इस्टर्न रेलवे ने 25 फीसदी बढ़त दर्ज करते हुए अब तक 6.99 मिलियन टन आयरन ओर की ढुलाई की है. ठीक उसी तरह चालू वित्तीय वर्ष की तिमाही में भी साउथ इस्टर्न रेलवे ने 22.72 फीसदी वृद्धि की है. इसके लिए रेलवे की नयी ढुलाई नीति काफी कारगर साबित हुई है. नयी नीति 10 मई से लागू हुई है, जो कि मार्च 2017 तक लागू रहेगी. रेलवे बोर्ड ने इस वित्तीय वर्ष में 10 फीसदी काजेंशन सरचार्ज व 15 फीसदी बिजी सीजन चार्ज को भी हटाने का निर्णय लिया है.
