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वन बस्ती इलाके के लोगों को मिलेगा जमीन का पट्टा

Updated at : 24 Jan 2015 6:58 AM (IST)
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वन बस्ती इलाके के लोगों को मिलेगा जमीन का पट्टा

मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुआ समीक्षा कार्य 15 मार्च तक काम खत्म करने का निर्देश अलीपुरद्वार : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर जिला भूमि व भूमि सुधार विभाग ने अलीपुरद्वार जिले के वनबस्ती इलाकों में जमीन समीक्षा का काम शुरू किया है. समीक्षा का काम दो चरणों में पूरा होगा. 15 मार्च के […]

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुआ समीक्षा कार्य
15 मार्च तक काम खत्म करने का निर्देश
अलीपुरद्वार : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर जिला भूमि व भूमि सुधार विभाग ने अलीपुरद्वार जिले के वनबस्ती इलाकों में जमीन समीक्षा का काम शुरू किया है. समीक्षा का काम दो चरणों में पूरा होगा.
15 मार्च के अंदर समीक्षा का काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है. समीक्षा के बाद भूमि सुधार विभाग राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेजेगी. रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार वन बस्तीवासियों की जमीन का नक्शा तैयार करेगी और बाद में जमीन का पट्टा वन वासियों को दिया जायेगा.
इसबीच,आरएसपी समर्थित नॉर्थ बंगाल फॉरेस्ट मजदूर यूनियन का कहना है कि कहीं कहीं वन विभाग समीक्षा के काम में रूकावट डाल रही है. हालांकि वन विभाग ने इन आरोपों को बेबुनियाद करार दिया.
अलीपुरद्वार जिला भूमि व भूमि सुधार विभाग के अधिकारी पीटी शेरपा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले के 70 वन बस्ती इलाके में जमीन के समीक्षा का काम शुरू किया गया है. इन इलाकों में रह रहे लोगों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा वन बस्ती की जमीन की समीक्षा का काम शुरू किये जाने से हम खुश है. हांलाकि जिले के वाम नेताओं का कहना है कि वाम शासनकाल से ही यह मांग की जा रही थी, लेकिन वन विभाग के आदमी जमीन समीक्षा के काम में बाधा दे रहे हैं.
बक्सा जंगल के क्षेत्रीय अधिकारी भास्कर जेबी ने आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि भूमि सुधार विभाग के काम में गांव के लोग ही बाधा डाल रहे हैं. भूमि सुधार विभाग के कामकाज में सहायता के लिए सभी रेंज व बीट ऑफिस के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है.
अलीपुरद्वार जिले के छह ब्लॉकों में 70 वन बस्ती है. इसमें से कालचीनी में ही 45 वन बस्ती व कुमारग्राम में 13 वन बस्ती है. बक्सा जंगल, चिलापाता व जलदापाड़ा जंगल के निकट वन बस्ती इलाकों में करीब 35 हजार लोग रहते है. सबसे छोटा बस्ती है कुमारग्राम का न्यू लैंड फॉरेस्ट बस्ती. यहां मात्र 38 परिवार रहते हैं. कुमारग्राम के भुटिया वन बस्ती में 68 परिवार रहते थे, लेकिन यहां के कुछ परिवारों को हातिपोता में पुनर्वासित किया गया है.
वन बस्ती वालों के पास उनकी जमीन पर कोई अधिकार नहीं है. माना जा रहा है कि जमीन का पट्टा मिल जाने पर वन बस्ती वासियों की सारी समस्याएं दूर हो जायेगी.
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