सरकार की ओर से भेजे गये अपने अभिभाषण में परिवर्तन कर सकते हैं राज्यपाल धनखड़
Updated at : 06 Feb 2020 2:40 AM (IST)
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कोलकाता : राज्यपाल जगदीप धनखड़ राज्य विधानसभा के बजट सत्र में अपने पारंपरिक अभिभाषण में परिवर्तन कर सकते हैं. संवाददाताओं से बातचीत में राज्यपाल ने इस संबंध में संकेत दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई मतभेद है, तो उनके और राज्य सरकार में यह टकराव का मुद्दा नहीं है, बल्कि दोनों ही पक्षों को एक […]
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कोलकाता : राज्यपाल जगदीप धनखड़ राज्य विधानसभा के बजट सत्र में अपने पारंपरिक अभिभाषण में परिवर्तन कर सकते हैं. संवाददाताओं से बातचीत में राज्यपाल ने इस संबंध में संकेत दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई मतभेद है, तो उनके और राज्य सरकार में यह टकराव का मुद्दा नहीं है, बल्कि दोनों ही पक्षों को एक दूसरे के मत का सम्मान करना होगा.
श्री धनखड़ ने बताया कि उनके अभिभाषण का ड्राफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के बाद उन्हें भेजा गया है. उसपर वह विचार कर रहे हैं. लेकिन अगर वह कोई मुद्दा छोड़ देते हैं या उसमें जोड़ते हैं, तो वह उसे औपचारिक तरीके से करेंगे. भले ही कई मुद्दों पर मतभेद हों, स्थिति राज्य सरकार के साथ टकराव के स्तर पर नहीं जा सकती. भारतीय संविधान, स्थापित कानून और लोगों के कल्याण व विकास का ध्यान रखा जाना चाहिए.
इधर, सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार द्वारा भेजे गये अपने अभिभाषण के ड्राफ्ट पर राज्यपाल ने आपत्ति जतायी है. गौरतलब है कि राज्यपाल के अभिभाषण को सरकार की ओर से ही तैयार किया जाता है.
भेजे गये अभिभाषण के ड्राफ्ट में कई स्थानों पर बदलाव करने के लिए राज्यपाल ने राज्य सरकार से कहा है. उल्लेखनीय है कि आगामी सात फरवरी को राज्य विधानसभा में बजट सत्र है. सत्र की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण होगा. इसकी प्रति सरकार की ओर से राजभवन में भेज दी गयी है. सूत्रों के मुताबिक उक्त अभिभाषण के ड्राफ्ट पर राज्यपाल ने आपत्ति जतायी है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि ‘लॉ ऑफ लैंड’ (स्थापित कानून) के खिलाफ वह कुछ नहीं कहेंगे.
कई मंत्री व अिधकारी कर चुके हैं मुलाकात :
इधर, रविवार को राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की थी. दोनों के बीच में काफी देर तक चर्चा हुई. सोमवार को पार्थ चटर्जी और वित्त मंत्री अमित मित्रा भी गये थे.
इसके बाद मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा भी राजभवन पहुंचे थे. लेकिन सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल ने भेजे गये अभिभाषण को यथावत पढ़ने पर आपत्ति जतायी है. इसके पूर्व सीएए के खिलाफ मुख्यमंत्री के आंदोलन और सरकारी पैसे से विज्ञापन दिये जाने पर राज्यपाल ने आपत्ति जतायी थी. उनका कहना था कि देश के स्थापित कानून का विरोध कोई सरकार नहीं कर सकती.
माना जा रहा है कि बजट सत्र के उनके अभिभाषण में भी राज्य सरकार की ओर से सीएए के विरोध की बात कही गयी है और राज्यपाल ने इसे पढ़ने पर आपत्ति जतायी है. दूसरी ओर, पार्थ चटर्जी ने कहा है कि उन्होंने संविधान और परंपरा का ध्यान रखते हुए राज्यपाल से मुलाकात की थी. लेकिन राज्यपाल अगर इसका सम्मान न करें, तो वह कुछ नहीं कर सकते.
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