धर्म बचता है, धर्माचरण से : क्षमाराम महाराज
Updated at : 31 Dec 2019 6:22 AM (IST)
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हावड़ा : हिंदू धर्म को मानने वाले लोग ही आज हिंदू धर्म को नष्ट करने में लगे हैं. साथ ही अपने धर्म की खिल्ली भी उड़ा रहे हैं. धोती पहनना और चोटी रखना, शर्म की बात समझने लगे हैं. मंदिर में जाने और गीता पढ़ने में शर्म करते हैं. धर्म बचता है, धर्माचरण से. दूसरे […]
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हावड़ा : हिंदू धर्म को मानने वाले लोग ही आज हिंदू धर्म को नष्ट करने में लगे हैं. साथ ही अपने धर्म की खिल्ली भी उड़ा रहे हैं. धोती पहनना और चोटी रखना, शर्म की बात समझने लगे हैं. मंदिर में जाने और गीता पढ़ने में शर्म करते हैं.
धर्म बचता है, धर्माचरण से. दूसरे धर्म वाले आज हमारे आचरण को देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं कि हम पाश्चात्य संस्कृति में किस तरह डूब गये हैं. 31 दिसंबर की रात को नये वर्ष के स्वागत में लोग रात भर नाचेंगे, गायेंगे. यह अपसंस्कृति है. यह हिंदू संस्कृति नहीं है. आजकल हमारे घर में विवाह एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर सिनेमा के गानों की धुन पर न केवल लोग नाचते हैं, वरन नाचने-गाने वालों को भी बुलाते हैं जो गलत है.
यह हमारे धर्म के अनुरूप नहीं है. घर में विवाह हो या मांगलिक अवसर, भगवान की लीलाओं का गान या मंचन होना चाहिए. हमें आज आत्म अवलोकन करने की जरूरत है. भगवान राम भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं. राम का आचरण ही हमारा आचरण होना चाहिए. रामकथा की सारी जिम्मेवारी अयोध्या कांड पर निर्भर है. अयोध्या कांड भगवान राम का कटि प्रदेश है. वनवास पाने पर राम विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना लेते हैं. राम को राजसिंहासन मिले या वनवास मिले, उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता. राम निर्विकार हैं.
ये बातें हावड़ा सतसंग समिति के तत्वावधान में रामचरितमानस का नवाह्न परायण पाठ करते हुए सिंहस्थल पीठाधीश्वर क्षमाराम महाराज ने हावड़ा हाउस के प्रांगण में कहीं. श्रद्धालुओं का स्वागत मनमोहन मल्ल, निर्मला मल्ल, पुरुषोत्तम पचेरिया, पवन पचेरिया एवं हरि भगवान तापड़िया ने किया. महावीर प्रसाद रावत ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि रामचरितमानस का पाठ चार जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 12.15 बजे से शुरू होगा.
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