एसटी-एससी के लिए अलग-अलग आयोग बनाने संबंधी विधेयक जल्द होगा पेश
Updated at : 07 Dec 2019 2:20 AM (IST)
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वर्तमान सत्र में भी विधेयक पारित करना चाहती है राज्य सरकार राज्यपाल ने दे दी है विधेयक को मंजूरी कोलकाता : बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कल्याण के लिए दो नये आयोग गठित करने की घोषणा पहले ही कर दी थी. अब आयोग के गठन को […]
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वर्तमान सत्र में भी विधेयक पारित करना चाहती है राज्य सरकार
राज्यपाल ने दे दी है विधेयक को मंजूरी
कोलकाता : बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कल्याण के लिए दो नये आयोग गठित करने की घोषणा पहले ही कर दी थी. अब आयोग के गठन को लेकर राज्य सरकार इस संबंध में बहुत जल्द विधानसभा में विधेयक पेश किया जायेगा.
राजनीतिक विशेषज्ञ इसे वोट बैंक की राजनीति के तहत पिछड़ी जातियों को लुभाने की कवायद मान रहे हैं. अब तक राज्य में पिछड़ी जाति श्रेणी के लोगों को लेकर एक आयोग था, जिसमें अनुसूचित जाति व जनजाति दोनों श्रेणी के लोग थे, लेकिन अब अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए अलग-अलग आयोग का गठन किया जायेगा.
जानकारी के अनुसार, आइएएस स्तर के अधिकारी आयोग का अध्यक्ष और डीआइजी रैंक का आइपीएस अधिकारी आयोग के सदस्य होंगे. आयोग उक्त समुदाय के लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए उपाय करेगा और लोगों को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए उनके सुझावों को सुनेगा.
सरकार के इस कदम को राज्य के आदिवासी बहुल जंगलमहल के जिलों पुरुलिया, मेदिनीपुर, बीरभूम, झाड़ग्राम और बांकुड़ा के तहत पड़ने वाले विधानसभा क्षेत्रों में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के बढ़े वोटबैंक की काट के रूप में भी जोड़ कर देखा जा रहा है. लोकसभा चुनाव में उक्त जिलों से तृणमूल के हक में जब जनादेश नहीं आया तो कई तरह की बातें सामने आयी.
पार्टी की मंथन में निकल कर आया कि आदिवासी बहुल जिलों में लोगों को अपने अधिकारों का लाभ नहीं मिल रहा है. इसके बाद इसी साल दो जुलाई को इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सभी 84 एससी / एसटी विधायकों (सभी राजनीतिक दलों से) के साथ राज्य विधानसभा में एक बैठक की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर हाल में एससी/एससी प्रमाणपत्रों के संवितरण की प्रक्रिया में तेजी लानी होगी.
इसी दौरान दो अलग-अलग आयोगों का मुद्दा भी उठा था. सूत्रों के अनुसार, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री पद से राजीव बनर्जी को हटाकर समुदाय से जुड़े उत्तर बंगाल के वरिष्ठ विधायक विनय कृष्ण बर्मन को लाना उनके इस अभियान की एक कड़ी मानी जा रही है.
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