हर साल कैंसर के कारण मारे जाते हैं सात लाख से अधिक लोग

Updated at : 19 Nov 2019 1:44 AM (IST)
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हर साल कैंसर के कारण मारे जाते हैं सात लाख से अधिक लोग

कोलकाता : विश्व भर में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच भारत में हर वर्ष कैंसर के 11 लाख मामले दर्ज किये जा रहे हैं और करीब सात लाख 80 हजार लोगों की हर वर्ष कैंसर के कारण मौत हो जाती है. ग्लोबल कैंसर इंसीडेंस, मोरालिटी और प्रीविलेंस (ग्लोबोकोन) के विश्वभर से जुटाये गये आकड़ों […]

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कोलकाता : विश्व भर में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच भारत में हर वर्ष कैंसर के 11 लाख मामले दर्ज किये जा रहे हैं और करीब सात लाख 80 हजार लोगों की हर वर्ष कैंसर के कारण मौत हो जाती है.

ग्लोबल कैंसर इंसीडेंस, मोरालिटी और प्रीविलेंस (ग्लोबोकोन) के विश्वभर से जुटाये गये आकड़ों के अनुसार भारत में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है और यह बीमारी दिन पर दिन अधिक घातक बनती जा रही है. ग्लोबोकोन की रिपोर्ट के अनुसार कैंसर के मामलों में 30 और कैंसर से मरने के मामलों में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी है. ग्लोबोकोन के राज्यों के आंकड़ों के अनुसार भारत में कैंसर के होने और उससे मौत के मामले सबसे ज्यादा उत्तर-पूर्वी राज्यों में दर्ज किये गये हैं.

रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के सबसे ज्यादा मामले पाये गये हैं. आम तौर पर इस तरह का कैंसर धीरे-धीरे पनपता है और फिर प्रोस्टेट गांठ में सीमित हो जाता है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने अपने सर्वे में पाया कि देश के महानगर कोलकाता, पुणे, त्रिवेंद्रम, बेंगलुरु और मुंबई में इस घातक बीमारी को लेकर जागरुकता बेहद कम और यहां युवा पुरुष इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं.

यूरोलॉजी एवं यूरो-ऑन्कोलॉजी के सलाहकार डॉ अभय कुमार ने कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर कहा कि प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ती उम्र के साथ होने की सबसे ज्यादा संभावना है. विशेष रूप से 50 वर्ष की आयु के बाद कैंसर के होने की संभावना सबसे अधिक रहती है.
एक अध्ययन के अनुसार 70 वर्ष की आयु के बाद 31 से 83 प्रतिशत पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का कोई न कोई रूप होता है और इसके लक्षण बार-बार पेशाब आना, पेशाब रुकने में कठिनाई या रुकावट, मूत्र नली कमजोर होना या रुकावट, पेशाब या स्खलन के दौरान जलन या जलन जैसे कोई बाहरी लक्षण हो सकते हैं.
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