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Narada Sting Case : आइपीएस ऑफिसर एसएमएच मिर्जा गिरफ्तार, 30 तक सीबीआइ हिरासत में

Updated at : 26 Sep 2019 5:27 PM (IST)
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Narada Sting Case : आइपीएस ऑफिसर एसएमएच मिर्जा गिरफ्तार, 30 तक सीबीआइ हिरासत में

कोलकाता : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने नारद स्टिंग मामले में वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा को गुरुवार को निजाम पैलेस में पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर लिया. मिर्जा को बैंकशाल कोर्ट में सीबीआइ की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 30 सितंबर तक सीबीआइ की हिरासत में भेज दिया गया. […]

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कोलकाता : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने नारद स्टिंग मामले में वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा को गुरुवार को निजाम पैलेस में पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर लिया. मिर्जा को बैंकशाल कोर्ट में सीबीआइ की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 30 सितंबर तक सीबीआइ की हिरासत में भेज दिया गया. सीबीआइ ने पांच दिन की रिमांड मांगी, तो मिर्जा के वकील ने जमानत की अर्जी लगा दी. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मिर्जा को 30 सितंबर तक सीबीआइ की हिरासत में भेज दिया.

मालूम हो कि नारद स्टिंग में मिर्जा समेत तृणमूल के 12 नेता और मंत्री रिश्वत लेते दिख रहे हैं. सीबीआइ नारद कांड में मिर्जा की भूमिका को लेकर उनसे पूछताछ करना चाहती है. मामले के अन्य आरोपितों के साथ मिर्जा ने क्या लेन-देन किया, इसका भी पता लगाने की कोशिश करेगी. एसएमएच मिर्जा उस समय बर्द्धमान जिला के पुलिस अधीक्षक थे, जब नारद न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल्स ने यह स्टिंग ऑपरेशन किया था.

वीडियो में वह भी रुपये लेते हुए देखे गये थे. इस केस में सीबीआइ ने प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद तृणमूल के तत्कालीन राज्यसभा सांसद मुकुल रॉय, लोकसभा सांसद सौगत रॉय और पूर्व विधायक मदन मित्र जैसे पश्चिम बंगाल की राजनीति के बड़े नामों पर कथित तौर पर आपराधिक षडयंत्र रचने और भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था. मुकुल रॉय अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.

क्या है नारद स्टिंग मामला

नारद स्टिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और आइपीएस अधिकारियों को एक स्टिंग ऑपरेशन में कथित कारोबारी को लाभ पहुंचाने के बदले में उससे रुपये लेते दिखाया गया है. यह स्टिंग ऑपरेशन वर्ष 2014 में किया गया था. हालांकि, वीडियो फुटेज 2016 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले न्यूज पोर्टल पर अपलोड किये गये थे, जिससे राज्य की राजनीति में तूफान आ गया था. कलकत्ता हाइकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए सीबीआइ ने तृणमूल के शीर्ष 12 नेताओं के साथ ही मिर्जा भी शामिल हैं.

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